US-ईरान के बीच 45 दिनों के सीजफायर की कोशिश, पाकिस्तान समेत 3 देश करा रहे समझौता, क्या रुकेगी वॉर?

US Iran 45-day Ceasefire: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 28 फरवरी से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्ता की पुरजोर कोशिश की जा रही है. यह मेडिएशन पाकिस्तान और दो अन्य देश ऐसे समय करवा रहे हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे के अंदर समझौते की मोहलत दी है.

US Iran 45-day Ceasefire: ईरान में चल रही जंग को रोकने की एक और कोशिश की जा रही है. अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों का एक समूह संभावित 45 दिनों के संघर्षविराम (सीजफायर) की शर्तों पर चर्चा कर रहा है. खाड़ी क्षेत्र में जारी इस संघर्ष के अब और भी बड़े युद्ध में बदलने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान समझौते पर राजी नहीं होता है, तो देश में भारी तबाही मचने वाली है. इसी के मद्देनजर एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि बैकचैनल वार्ताओं के जरिए समझौते की कोशिश की जा रही है. 

एक्सियोस की रिपोर्ट में चार अमेरिकी, इजरायली और क्षेत्रीय सूत्रों का हवाला देते हुए कहा गया कि वार्ता में पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के मध्यस्थ शामिल हैं. साथ ही ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और अब्बास अराघची के बीच टेक्स्ट संदेशों के जरिए भी बातचीत हो रही है. प्रस्तावित ढांचे में दो चरण शामिल हैं. पहले चरण में 45 दिनों का संघर्षविराम लागू किया जाएगा, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर बातचीत होगी. जरूरत पड़ने पर इस अस्थायी संघर्षविराम को बढ़ाया भी जा सकता है. दूसरे चरण में पूरे क्षेत्र में युद्ध समाप्त करने के लिए व्यापक समझौता किया जाएगा.

मुश्किल है समझौता हो पाना

सूत्रों के अनुसार, अंतिम समझौते का मुख्य परिणाम होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना और ईरान के यूरेनियम भंडार का समाधान (या तो उसे कम करना या देश से बाहर ले जाना) हो सकता है. इन दोनों मुद्दों को लागू करने के लिए उपायों पर काम किया जा रहा है. हालांकि, कई अहम मुद्दे अब भी सुलझे नहीं हैं. रिपोर्ट में यह कहा गया है कि हाल के दिनों में ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान को दिए गए कई प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया गया है. 

होर्मुज और परमाणु- ये दोनों मुद्दे ईरान की वार्ता में सबसे बड़े सौदेबाजी के हथियार हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान अपनी प्रमुख रणनीतिक ताकत- होर्मुज पर नियंत्रण और यूरेनियम भंडार को केवल 45 दिनों वाले संघर्षविराम के बदले पूरी तरह छोड़ने के लिए तैयार नहीं होगा. ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे गाजा या लेबनान जैसी स्थिति में नहीं फंसना चाहते, जहां कागज पर संघर्षविराम हो लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल जब चाहें फिर से हमला कर दें.

ट्रंप ने ईरान को तबाह करने की दी है धमकी

ऐसे में अगले 48 घंटों में किसी आंशिक समझौते की उम्मीद बेहद कम है. एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि वॉशिंगटन ने हाल के दिनों में कई प्रस्ताव दिए हैं, लेकिन ईरान ने अब तक किसी को स्वीकार नहीं किया है. यह वही समय-सीमा है जिसकी डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है. उन्होंने रविवार सुबह (अमेरिकी समयानुसार) कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला किया जाएगा. 

राजनयिकों का मानना है कि यह आखिरी मौका है, जिससे बड़े स्तर पर सैन्य टकराव को रोका जा सकता है. अगर बातचीत विफल होती है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर बड़े हमले हो सकते हैं, इसके जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशों के ऊर्जा और जल संयंत्रों को निशाना बनाया जा सकता है.

ट्रंप ने बढ़ाई हमले की समय-सीमा

डोनाल्ड ट्रंप की ओर से तेहरान को दी गई समय-सीमा बढ़ गई है. पहले यह समय-सीमा सोमवार शाम तक थी, जिसे उन्होंने 20 घंटे बढ़ा दिया. ट्रंप ने कहा कि बातचीत जारी है और समझौते की उम्मीद अभी भी है, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वार्ता विफल होती है तो व्यापक सैन्य कार्रवाई की जाएगी. 

ट्रंप ने रविवार (5 अप्रैल) को द वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समय-सीमा भारतीय समयानुसार, मंगलवार (7 अप्रैल 2026) शाम तक है. उन्होंने कहा कि अगर वे सहयोग नहीं करते और सब कुछ बंद रखना चाहते हैं, तो वे अपने देश के हर पावर प्लांट और अन्य संयंत्र खो देंगे. 

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‘मंगलवार पावर प्लांट और पुल डे’: ट्रंप

रविवार को उन्होंने और भी कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए ईरान को धमकी दी. ईस्टर के मौके पर उन्होंने कहा कि मंगलवार को ईरान में पावर प्लांट दिवस और पुल दिवस, सब एक साथ मनाया जाएगा… होर्मुज स्ट्रेट खोलो, वरना तुम नरक में रहोगे… एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि समझौता न होने की स्थिति में बड़े स्तर पर विनाश करने की धमकी दी. एक्सियोस को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा सोमवार को अच्छा मौका है, इसकी अच्छी संभावना है, लेकिन अगर वे कोई डील नहीं करते हैं, तो हम वहां सब कुछ उड़ाने और तेल पर कब्जा करने की सोच रहे हैं.

ईरान का पलटवार

हालांकि, ईरान को इससे कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है. रविवार की रात रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की नौसेना इकाई ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब पहले जैसी कभी नहीं होगी, खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के लिए. इन कड़वी बयानबाजी वाले हालात में सीजफायर  की संभावना पर बात हो रही है. 

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By Anant narayan shukla

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उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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