ईरान ने भारत को बताया बड़ा गेमचेंजर, कहा- वेस्ट एशिया में शांति के लिए नई दिल्ली का रोल सबसे असरदार

Iran Envoy: वेस्ट एशिया में छिड़ी जंग के बीच ईरान ने भारत की डिप्लोमेसी को सबसे प्रभावी बताया है. ईरानी राजदूत ने साफ किया कि चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट बाहरी दबाव से नहीं रुकेंगे. साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल ईरान की सैन्य ताकत और जनता की एकता को भांपने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं.

Iran Envoy: वेस्ट एशिया (मिडल ईस्ट) में चल रही जंग अब पांचवें हफ्ते में पहुंच गई है. इस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में भारत के रुख की जमकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि भारत जिस तरह बातचीत और संयम बरतने की बात कह रहा है, वह बहुत बड़ी बात है और इस तनाव को कम करने में भारत बहुत असरदार भूमिका निभा सकता है. मिडल ईस्ट (वेस्ट एशिया) दुनिया का वह हिस्सा है जहां एशिया, अफ्रीका और यूरोप मिलते हैं, और यह क्षेत्र मुख्य रूप से अपने विशाल तेल भंडार और रणनीतिक लोकेशन के लिए जाना जाता है.

यह मिस्र, ईरान, तुर्की और सऊदी अरब जैसे लगभग 17 देशों का समूह है, जो इस्लाम, ईसाइयत और यहूदी धर्म जैसे प्रमुख धर्मों का केंद्र होने के साथ-साथ अक्सर राजनीतिक तनाव के कारण चर्चा में रहता है.

ईरान बोला- भारत का साथ जरूरी, इजरायल और अमेरिका पर साधा निशाना

राजदूत फताली ने एएनआई से बातचीत में कहा कि भारत ने जो शांति का रास्ता अपनाने की सलाह दी है, वह एक जिम्मेदार देश की पहचान है. हालांकि, उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भारत जैसे आजाद और शांति पसंद देश, अमेरिका और इजरायल के उन सैन्य हमलों की खुलकर निंदा करेंगे जिन्होंने ईरान की सीमाओं का उल्लंघन किया है. उन्होंने दावा किया कि इन हमलों में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और आम लोगों के घरों को निशाना बनाया गया है.

जंग की शुरुआत हम नहीं करेंगे, लेकिन खत्म ईरान ही करेगा

ईरानी राजदूत ने साफ किया कि ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा और न ही वह कभी पहले हमला करेगा. लेकिन उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर उन पर युद्ध थोपा गया, तो वह कब खत्म होगा, कितनी दूर तक फैलेगा और उसका अंत कैसे होगा. यह सब कुछ ईरान ही तय करेगा. उन्होंने मौजूदा स्थिति को बाहरी हमलों के खिलाफ ईरान का ‘जायज बचाव’ करार दिया.

चाबहार पोर्ट पर नहीं चलेगा किसी का दबाव

चाबहार पोर्ट को लेकर अमेरिका द्वारा 26 अप्रैल तक दी गई पाबंदी की छूट (सेंक्शन वेवर) पर भी फताली ने अपनी राय दी. उन्होंने कहा कि चाबहार एक बहुत ही खास प्रोजेक्ट है जो भारत को सेंट्रल एशिया से जोड़ता है. आर्थिक विकास के ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स किसी देश की एकतरफा पाबंदियों से प्रभावित नहीं होने चाहिए. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान इस मामले में लगातार भारत के संपर्क में है और वे चाहते हैं कि बिना किसी बाहरी दबाव के यह काम चलता रहे.

ट्रंप के बदलते सुर 

राजदूत ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल जिस ‘सत्ता परिवर्तन’ (रिजीम चेंज) के इरादे से आए थे, उसमें वे फेल हो गए हैं. उन्होंने कहा कि इस संकट ने ईरान के लोगों को और भी ज्यादा एकजुट कर दिया है. फताली ने तंज कसते हुए कहा कि पहले जो डोनाल्ड ट्रंप सत्ता बदलने की बातें करते थे, अब वे होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को खोलने की बात कर रहे हैं, जो कि युद्ध से पहले भी सबके लिए खुला ही था. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की लीडरशिप और मिलिट्री ताकत को समझने में बड़ी गलती की है.

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ब्रिक्स (BRICS) से बड़ी उम्मीदें

इंटरव्यू के अंत में राजदूत ने ब्रिक्स देशों के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ईरान के लिए ब्रिक्स एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां वे पुरानी ग्लोबल व्यवस्थाओं से हटकर नए उभरते देशों के साथ काम कर सकते हैं. उन्होंने ब्रिक्स देशों से अपील की कि वे अमेरिका और इजरायल की ‘गैरकानूनी’ हरकतों के खिलाफ स्टैंड लें और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन कराने में मदद करें. फिलहाल ईरान-इजरायल का यह विवाद दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है.

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लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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