गैर-सरकारी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 180 देशों की हालिया रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मीडिया की आजादी और भ्रष्टाचार के मामले में भारत का नाम इसलिए सबसे खराब स्थिति वाले देशों में शामिल है, क्योंकि भारत के पास भ्रष्टाचार निरोधी कोई ठोस संस्थागत संरचना नहीं है, जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सके. शासन- प्रशासन तंत्र […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
गैर-सरकारी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 180 देशों की हालिया रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मीडिया की आजादी और भ्रष्टाचार के मामले में भारत का नाम इसलिए सबसे खराब स्थिति वाले देशों में शामिल है, क्योंकि भारत के पास भ्रष्टाचार निरोधी कोई ठोस संस्थागत संरचना नहीं है, जो भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सके.
शासन- प्रशासन तंत्र में ऊपर से नीचे तक यह समस्या व्याप्त है. आज भारत में भ्रष्टाचार एक कला बन गया है और इसके देशभर में अनगिनत कलाकार पैदा होना स्वाभाविक है. कला एक ऐसी चीज है, जिससे दूसरे या आसपास के लोग न केवल प्रभावित होते हैं, बल्कि उस फन में माहिर होने के सारे प्रयास भी करते हैं.
खासतौर पर, हमारे समाज में जहां इतनी आर्थिक विषमताएं हैं, वहां किसी भी तरीके से धनलाभ हासिल करके खुद को शक्ति-संपन्न बनाने या सत्ता के नजदीक होने की कला को ज्यादातर लोग सीखना चाहेंगे. हालांकि, भ्रष्टाचार को एक कला मानना किसी विडंबना से कम नहीं है, इसलिए संभव हो तो आप इसे कोई नयी संज्ञा भी दे सकते हैं. लेकिन, इसे चाहे जो भी संज्ञा मिले, हर हाल में, भ्रष्टाचार को रोकने के लिए संस्थागत संरचना का ठोस होना बहुत जरूरी है.
मौजूदा राजनीति भ्रष्टाचार का व्याकरण!
मैं जहां से देख रहा हूं, मुझे यही नजर आता है कि हमारी मौजूदा राजनीति एक तरह से भ्रष्टाचार का व्याकरण है, शब्द-शास्त्र है. ऐसा इसलिए, क्योंकि मौजूदा राजनीति का जो चरित्र है, वह भ्रष्टाचार को न केवल संरक्षण प्रदान करती है, बल्कि इसे विस्तार देने का भी काम करती है. मौजूदा राजनीति एक प्रकार की सत्ता-शक्ति का व्याकरण भी है,
और सच कहें, तो भारत में भ्रष्टाचार अब राजनीतिक क्षमता का एक स्वरूप बन चुका है. यही वजह है कि एक नेता के सामने आम नागरिक की हैसियत कुछ भी नहीं रह जाती है और कॉरपोरेट के बड़े-बड़े लोग भ्रष्ट होकर भी राजनीति की नजर में ज्यादा हैसियत वाले होते हैं.
भ्रष्टाचार से समाज अगर प्रदूषित है या इसे लेकर अगर कोई यह सवाल करे कि इसके लिए हमारा समाज और कानून-प्रशासन कितने जिम्मेदार हैं, तो मैं यही कहूंगा कि यह एक शासकीय प्रश्न जरूर है. लेकिन, इससे भी ज्यादा यह शासन प्रणाली (सिस्टम) का सवाल है कि आखिर हमारे समाज को किस प्रकार की शासन प्रणाली संचालित करती है. दरअसल, भ्रष्टाचार विविध समूहों तक पहुंच प्रदान करने का एक तरीका भी है, इसलिए इसके लिए शासन और सिस्टम ही जिम्मेदार हैं.
कानूनों को बनाना होगा आसान
भ्रष्टाचार को दूर करने के कई तरीके हो सकते हैं, लेकिन सबसे पहले जरूरी है कि हम भ्रष्टाचार निरोधी संस्थागत संरचनाओं का विस्तार करें और लोगों के लिए उनकी पहुंच आसान बनाएं, ताकि लोग खुद भी भ्रष्टाचार को दूर करने का हिस्सा बन सकें. दूसरी जरूरी बात यह है कि हम अपने कानूनों और शासन की जटिलताओं को दूर कर आम जनता के लिए उन्हें आसान बनाएं. समाज का एक बड़ा हिस्सा इन जटिलताओं को समझ ही नहीं पाता, इसलिए वह अपने अधिकार से वंचित रहता है, और किसी भ्रष्टाचार को रोकने के बजाय उसका हिस्सा बन जाता है. भ्रष्टाचार क्यों बढ़ता है, इसे केवल राजनीति या शासन- प्रशासन के स्तर पर समझने की जरूरत नहीं है, बल्कि समाज स्तर पर भी समझने की जरूरत है.
आज भारत में भ्रष्टाचार एक कला बन गया है और इसके देशभर में अनगिनत कलाकार पैदा होना स्वाभाविक है. कला से आसपास के लोग न केवल प्रभावित होते हैं, बल्कि उस फन में माहिर होने का प्रयास भी करते हैं.
368 पत्रकारों की हत्या कर दी गयी दुनियाभर में वर्ष 2012 से 2017 के दौरान. इनमें से 352 पत्रकारों की हत्या सीपीआई औसत से कम स्काेर वाले देशों में, जबकि 16 की हत्या औसत से अधिक स्कोर वाले देशों में हुई है.
70 पत्रकारों की हत्या भ्रष्टाचार से जुड़ी रिपोर्ट के मामले में हुई थी.
179 पत्रकारों की हत्या के मामले में किसी को सजा नहीं हुई यानी उन्हें न्याय नहीं मिल सका.
भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलने पर किसी भी कार्यकर्ता या पत्रकार को अपने जीवन का डर नहीं होना चाहिए. दुनियाभर में सिविल सोसाइटी और मीडिया, दोनों पर मौजूदा कार्रवाइयों को देखते हुए, आज जरूरत इस बात की है कि हमें उन लोगों की सुरक्षा करनी होगी, जो इस संबंध में अपनी आवाज बुलंद करते हैं.