इसलामाबाद : पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर सामने आया है. उफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच मुलाकात के मात्र तीन ही बाद ही वह अपने रुख से पलट गया. अपने ‘उसूलों’ का हवाला देते हुए उसने मुंबई हमला मामले में भारत से ज्यादा सबूत व सूचना मांगी और दो टूक कहा कि एजेंडे पर कश्मीर मुद्दा रखे बगैर भारत के साथ कोई वार्ता नहीं हो सकती.
राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी मामलों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत के दौरान एजेंडे में कश्मीर का मुद्दा जरूरी है. इस पर बातचीत के बगैर किसी दूसरे मसले पर बातचीत मुमकिन नहीं है. फिलहाल हम पुराने मुद्दों पर ही खड़े हैं. वैसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए मोदी-नवाज की मुलाकात अच्छी शुरुआत है, लेकिन कोई अपने उसूलों और इज्जत से समझौता कैसे कर सकता है. हम तो ऐसा कतई नहीं करेंगे. उल्लेखनीय है कि उफा में मोदी व शरीफ की मुलाकात के दौरानअजीज भी मौजूद थे.
लखवी पर और सबूत की दरकार
अजीज ने मुंबई आतंकवादी हमला मामले में लश्कर-ए-तैयबा ऑपरेशन कमांडर जकी-उर-रहमान लखवी के खिलाफ सुनवाई पर कहा कि पाकिस्तान को इस संबंध में भारत से ज्यादा सूचना और सबूत दरकार है. जबकि रूस के उफा में शरीफ और मोदी की मुलाकात के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया था कि दोनों पक्ष मुंबई हमला मामले की सुनवाई की रफ्तार तेज करने के तौर-तरीके खोजेंगे. भारत इससे नराज है कि 2008 के मुंबई हमला मामले में मुकदमा लगभग नहीं चला है. यहां तक कि लखवी को अदालत ने बरी कर दिया, क्योंकि पाकिस्तान सरकार आवश्यक सबूत मुहैया कराने में नाकाम रही. भारत अपने इस रुख पर कायम है कि उसने 2008 के मुंबई हमले के आरोपितों को इंसाफ के कठघरे में ले जाने के लिए पाकिस्तान को पर्याप्त सूचना व सबूत उपलब्ध करा चुका है.
