बजट 2020: क्वांटम टेक्नॉलजी पर सरकार खर्च करेगी 8 हजार करोड़, जानिये इसकी जरूरतों के बारे में

नयी दिल्लीः केंद्र की मोदी सरकार ने क्वांटम कम्प्यूटिंग और अनुप्रयोगों के राष्ट्रीय मिशन के तहत क्वांटम कम्प्यूटिंग से जुड़ी तकनीकों के विकास के लिए 8,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी कम्प्यूटिंग, संचार, साइबर सुरक्षा में नए अनुप्रयोगों का प्रसार कर […]

नयी दिल्लीः केंद्र की मोदी सरकार ने क्वांटम कम्प्यूटिंग और अनुप्रयोगों के राष्ट्रीय मिशन के तहत क्वांटम कम्प्यूटिंग से जुड़ी तकनीकों के विकास के लिए 8,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी कम्प्यूटिंग, संचार, साइबर सुरक्षा में नए अनुप्रयोगों का प्रसार कर रही है. उम्मीद है कि सैद्धांतिक रचनाओं से बहुत सारे व्यावसायिक अनुप्रयोग निकलेंगे, जो इस क्षेत्र में विकसित हो रहे हैं.

उन्होंने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोगों पर राष्ट्रीय मिशन के लिए पांच वर्ष की अवधि में 8,000 करोड़ रुपये का देने का प्रस्ताव है. इलेक्ट्रॉनिक्स तथा आईटी मंत्रालय ने 27 संभावित क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान के लिए इजरायल के साथ एक समझौता किया है, जिसमें क्वांटम कंप्यूटिंग शामिल है.

सीतारमण ने कहा कि यदि हम क्वांटम प्रौद्योगिकी से संबंधित कंप्यूटिंग और अन्य अनुप्रयोगों की इस तकनीक में कामयाबी पाने में सक्षम हुए, तो भारत ऐसा करने वाला शायद तीसरा सबसे बड़ा और अग्रणी देश होगा.

क्या है ये प्रौद्योगिकी
मोदी सरकार शुरुआत से ही टेक्नॉलजी और डिजिटलीकरण पर जोर देती आई है. क्वांटम एक ऐसी तकनीक है जो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस से भी कहीं आगे है. टेक्नॉलजी की दुनिया में काफी समय से क्वांटम कंप्यूटिंग पर काम चल रहा है. टेक्नॉलजी एक्सपर्ट्स का मानना है कि भौतिकी के क्वांटम सिद्धांत पर काम करने वाली इस कंप्यूटिंग में अपार संभावनाएं हैं. रिसर्च के लिए भी यह एक बेहतर ऑप्शन हैं.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पूरी तरह से डेवलप हो चुका क्वांटम कंप्यूटर मौजूदा समय के सबसे ताकतवर सुपर कंप्यूटर से भी ज्यादा होगी. क्वॉन्टम कंप्यूटिंग ऐसे टेक्नॉलजी है, जिसकी मदद से बड़े डेटा और इन्फॉर्मेशन को बहुत कम वक्त में प्रोसेस किया जा सकेगा.
क्वॉन्टम कंप्यूटर की मदद से कंप्यूटिंग से जुड़े टास्क बेहद कम वक्त में किए जा सकेंगे, जिनमें मौजूदा डिवाइसेज और टेक्नॉलजी पूरा करने में कई साल लगा देंगे. इस नए प्रोसेसर की मदद से नई दवाओं की खोज से लेकर शहरों का मैनेजमेंट और ट्रांसपोर्ट जैसे काम आसान हो जाएंगे.

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