<figure> <img alt="कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी" src="https://c.files.bbci.co.uk/12349/production/_110496547_15332295-ee10-47ee-8f4f-e50e2434b7d0.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>नए नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण (एनआरसी) को लेकर सोमवार दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक हुई. </p><p>इस बैठक में 20 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया लेकिन सीएए और एनआरसी का विरोध कर रहे कुछ प्रमुख दल इसमें शामिल नहीं हुए. </p><p>बहुजन समाज पार्टी (बसपा), आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), शिवसेना और डीएमके ने इस बैठक से दूरी बना ली. </p><p>बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी नागरिकता संशोधन क़ानून और एनआरसी को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में होने वाली बैठक में हिस्सा नहीं लेगी.</p><p>मायावती ने ट्वीट कर कहा, "राजस्थान की कांग्रेस सरकार को बीएसपी का बाहर से समर्थन दिए जाने पर भी, इन्होंने दूसरी बार हमारे विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया. यह विश्वासघात है. ऐसे में कांग्रेस के नेतृत्व में सोमवार को विपक्ष की बुलाई गई बैठक में बीएसपी का शामिल होना, राजस्थान में पार्टी के लोगों का मनोबल गिराने वाला होगा."</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-51079775?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">मोदी से मुलाक़ात को लेकर क्यों हो रही है ममता की आलोचना</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-51009427?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">नरेंद्र मोदी और अमित शाह नाराज़ छात्रों से बात क्यों नहीं कर रहे</a></li> </ul><figure> <img alt="उद्धव ठाकरे और सोनिया गांधी" src="https://c.files.bbci.co.uk/10409/production/_110496566_3bc60847-1d3a-42ec-8929-e9da7fbbf4b1.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>वहीं, ख़बरे हैं कि आम आदमी पार्टी और महाराष्ट्र में कांग्रेस की सहयोगी शिवसेना का कहना था कि उन्हें इसके लिए निमंत्रण ही नहीं मिला. ममता बनर्जी पहले ही ख़ुद को इस बैठक से अलग कर चुकी हैं. </p><p>बसपा प्रमुख मायावती पहले ही सीएए और एनआरसी को लेकर विरोध जता चुकी हैं. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ सड़कों पर भी उतरी हैं. वहीं शिवसेना और आम आदमी पार्टी भी सीएए के समर्थन में नहीं दिखी हैं. </p><p>इसके बावजूद भी विपक्षी एकता दिखाने वाली इस बैठक से इनकी दूरी, लोकसभा चुनावों के उस समय की याद दिलाता है जब लगभग एकजुट दिख रहा विपक्ष चुनाव आते-आते बंट गया था. </p><p>उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और कांग्रेस का गठबंधन नहीं हो सका. दिल्ली में कांग्रेस और आप का गठबंधन नहीं हो पाया. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने भी अकेले दम पर चुनाव लड़ा. साथ ही सभी दलों ने किसी एक दल के नेतृत्व को स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया था. </p><p>इस बार भी एक समय पर एनआरसी और सीएए के मसले पर सरकार के ख़िलाफ़ एकसाथ दिख रहा विपक्ष फिर से बिखरा हुआ नज़र आ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि एकजुट होते-होते विपक्ष आख़िर क्यों टूट जाता है? विपक्षी एकता में दरार क्यों पड़ने लगती हैं? </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50827222?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">NPR का विरोध क्यों कर रही हैं ममता बनर्जी</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-50753439?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के बारे में भारत का दावा कितना सही?</a></li> </ul><figure> <img alt="लोकसभा चुनाव के दौरान लगभग सभी दल एक ही मंच पर इकट्ठा हुए थे." src="https://c.files.bbci.co.uk/92C1/production/_110496573_98cb266c-ff26-4dd2-a188-acd014a97701.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> <figcaption>लोकसभा चुनाव के दौरान लगभग सभी दल एक ही मंच पर इकट्ठा हुए थे.</figcaption> </figure><h1>कहीं आपसी टकराव, तो कहीं डर </h1><p>राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी कहती हैं कि विपक्षी दलों को जिस तरह एकजुट होना चाहिए, वैसा न तो वो संसद के भीतर और न ही बाहर इकट्ठा नहीं हो पाए. </p><p>नीरजा चौधरी कहती हैं, "दरअसल, इसमें सबके अपने हित छुपे हैं. जैसे ममता बनर्जी ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल में अपने तरीक़े से इसका विरोध कर रही हैं और आगे भी करेंगी. फिर आने वाले चुनावों में उसे कांग्रेस और लेफ़्ट दोनों से लड़ना है. वहीं, आम आदमी पार्टी को भी चुनावों में कांग्रेस का सामना करना है. शिवसेना की हिंदुत्ववादी विचारधारा रही है ऐसे में वो भी खुलकर सामने नहीं आना चाहती."</p><p>वहीं, वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का कहना है कि ये मसला विपक्ष की एकता से ज़्यादा एनआरसी और सीएए को लेकर लोगों के एकजुट होने का है. अभी देखा जाए तो भारत में लोगों की एकता का दायरा बढ़ा है. </p><p>उर्मिलेश कहते हैं, "बहुत सारी पार्टी इसका विरोध कर रही हैं. कुछ पार्टियों ने ये भी कह दिया है कि वो अपने राज्य में एनआरसी लागू नहीं करेंगी. इसलिए किसी बैठक में सभी दलों के ना आने से कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता. हां, कुछ दलों के अपने हित या नेताओं की आपसी तकरारें भी होती हैं जिस कारण वो बैठकों का बायकॉट करते हैं."</p><p>"एक बात और है कि सत्ताधारी दल भी अन्य दलों को मैनेज करता है. विपक्ष में काम करने वाले नेताओं के अपने हित और मजबूरियां हैं. कुछ नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामले लंबित हैं. तो इस कारण भी नेता दबाव में आ जाते हैं."</p><p>कुछ दलों के बैठक में शामिल न होने को लेकर कांग्रेस नेता तारिक़ अनवर कारण बताते हैं कि आपसी संवाद में कोई कमी रह गई है.</p><p>वो कहते हैं, "राज्य में राजनीतिक मतभेद अपनी जगह पर हैं लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर सब एक साथ हैं. हालांकि, कुछ दलों ने खुद को अलग कर लिया है. मुझे लगता है कि इसमें आपसी संवाद का अभाव है जो थोड़े समय बाद में साथ आ जाएंगे. शिवसेना की जहां तक बात है तो वो बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगी रही है और ये एक वैचारिक मामला तो है ही. उनकी विचारधारा बीजेपी से ज़्यादा मेल खाती थी. हमारे साथ वो अभी जुड़ी है. ऐसे में यूपीए के साथ एडजस्ट होने में थोड़ा समय तो लगेगा ही." </p><figure> <img alt="बसपा प्रमुख मायावती" src="https://c.files.bbci.co.uk/17169/production/_110496549_b715ab68-9f1e-4a50-b9cc-5c695f2edd27.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p><strong>अपने-अपने</strong><strong> हित </strong></p><p>जिन दलों ने भी कांग्रेस के नेतृत्व वाली बैठक में शामिल होने से इनकार किया उसमें बसपा ही ऐसा दल है जिसने कांग्रेस के प्रति नाराज़गी जाहिर करते हुए साफ़तौर पर अपना कारण बताया है. </p><p>राजस्थान में बसपा ने अशोक गहलोत सरकार को समर्थन दिया था लेकिन, पिछले साल बसपा के छह विधायक पार्टी छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए. मायावती ने कांग्रेस पर विधायक तोड़ने और विश्वासघात करने का आरोप लगाया है. </p><p>अगर राजस्थान में ऐसा न होता तो क्या कांग्रेस की इस बैठक में बसपा का समर्थन मिल सकता था. इस सवाल के जवाब में नीरजा चौधरी कहती हैं, "विपक्षी दलों द्वारा ये जो छोटे-छोटे खेल खेले जाते हैं उससे बड़ी लड़ाइयां प्रभावित होती है. अगर इस लड़ाई को लड़ना है तो इन खेलों से बचना होगा. लेकिन, विपक्ष इससे चूक रहा है."</p><figure> <img alt="विरोध प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/15229/production/_110496568_b10a0dcb-4385-45d2-8eed-6e682f817994.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p><strong>स्टूडेंट्स </strong><strong>का नेतृत्व क्यों नहीं स्वीकार</strong><strong>?</strong></p><p>विपक्षी दलों से सीएए और एनआरसी के विरोध में लगातार बयान आते रहे हैं लेकिन वो इसे हमेशा स्टूडेंट्स का ही विरोध प्रदर्शन कहते हैं. लेफ़्ट पार्टियों को छोड़ दें तो अन्य विपक्षी दल या उनके छात्र संगठन भी इसमें खुलकर नहीं उतरते. </p><p>इसके पीछे नीरजा चौधरी हिंदू ध्रुवीकरण की राजनीति को एक बड़ा कारण मानती हैं.</p><p>वह कहती हैं, "बीजेपी सरकार ने कहा है कि ये क़ानून गैर-मुस्लिम उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के लिए है, वो इसे उत्पीड़ित अल्पसंख्यक भी कह सकते थे. इससे कहीं न कहीं ध्रुवीकरण करने की कोशिश है. राजनीतिक दलों में भी डर है कि खुलकर सामने आने पर वो हिंदू वोटों को न खो दें. प्रियंका गांधी जैसे नेता उनसे मिलने जाते हैं लेकिन अपने स्तर से कोई विरोध प्रदर्शन नहीं करते. उनसे जुड़े छात्र संगठन भी पहल नहीं करते."</p><p>नीरजा चौधरी कहती हैं कि "सभी दलों में इस तरह सड़कों पर उतरकर विरोध करने की क्षमता भी नहीं है. जैसे कांग्रेस संगठन के स्तर पर कमज़ोर हुई है. क्षेत्रीय दल इस मामले में फिर भी मजबूत हैं."</p><figure> <img alt="विरोध प्रदर्शन" src="https://c.files.bbci.co.uk/1D91/production/_110496570_636c1b88-172e-4442-a4eb-434d64c627c5.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>वहीं, वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का मानना है कि ये अच्छी बात है कि ये विरोध प्रदर्शन राजनीतिक दलों के नेतृत्व में नहीं हो रहे है. </p><p>वह कहते हैं, "मुझे लगता है कि राजनेताओं से ज़्यादा कौशल एक्टिविस्ट के पास है. इस जनांदोलन में उतरा नौजवान बहुत समझदार है. हो सकता है कि उसमें से ही कोई नेता उभरकर आ जाए. जेपी आंदोलन में भी ऐसा ही हुआ था. ये एक राष्ट्रीय आंदोलन है क्योंकि ये क़ानून पूरे देश के लिए बना है."</p><p>सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन को नेतृत्व देने के सवाल पर तारिक़ अनवर कहते हैं कि पूरा विरोध प्रदर्शन स्टूडेंट्स और नौजवानों का है. "हम लोग उन्हें बाहर से प्रोत्साहन दे रहे हैं. क्योंकि ये मामला विद्यार्थियों के हाथ में है और आगे चलकर वो एक आकार ज़रूर लेगा."</p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi">यहां क्लिक</a><strong> कर सकते हैं. आप हमें </strong><a href="https://www.facebook.com/bbchindi">फ़ेसबुक</a><strong>, </strong><a href="https://twitter.com/BBCHindi">ट्विटर</a><strong>, </strong><a href="https://www.instagram.com/bbchindi/">इंस्टाग्राम </a><strong>और </strong><a href="https://www.youtube.com/user/bbchindi">यूट्यूब</a><strong>पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</strong></p>
विपक्षी एकता में बार-बार क्यों आ जाती है दरार?
<figure> <img alt="कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी" src="https://c.files.bbci.co.uk/12349/production/_110496547_15332295-ee10-47ee-8f4f-e50e2434b7d0.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>नए नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता पंजीकरण (एनआरसी) को लेकर सोमवार दिल्ली में कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों की बैठक हुई. </p><p>इस बैठक में 20 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया लेकिन सीएए और एनआरसी का विरोध कर […]
