सभी मोर्चों पर विफल रहने पर इमरान खान पाकिस्तानी मीडिया के निशाने पर

इस्लामाबाद : जाने-माने पाकिस्तानी अखबारों ने देश के समक्ष खासकर आर्थिक मोर्चों पर मौजूद चुनौतियों का समाधान करने में विफल रहने और शीर्ष सैन्य जनरल कमर जावेद बाजवा की नौकरी सुरक्षित रखने के लिए सैन्य कानून में संशोधन से संबंधित विधेयकों को पारित करने में अत्यावश्यक जल्दबाजी दिखाने को लेकर प्रधानमंत्री इमरान खान की आलोचना […]

इस्लामाबाद : जाने-माने पाकिस्तानी अखबारों ने देश के समक्ष खासकर आर्थिक मोर्चों पर मौजूद चुनौतियों का समाधान करने में विफल रहने और शीर्ष सैन्य जनरल कमर जावेद बाजवा की नौकरी सुरक्षित रखने के लिए सैन्य कानून में संशोधन से संबंधित विधेयकों को पारित करने में अत्यावश्यक जल्दबाजी दिखाने को लेकर प्रधानमंत्री इमरान खान की आलोचना की है.

डॉन ने सोमवार को अपने तीखे संपादकीय कहा, यह प्रवृति लगातार सामने आ रही है कि जब भी कोई महत्वपूर्ण फैसला किया जाता है तो जिस व्यक्ति की गैर हाजिरी सबसे अधिक चौंकाती है वह स्वयं प्रधानमंत्री होते हैं. इस अखबार के संपादकीय में कहा गया है कि फिलहाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्र ऐसी स्थिति में पहुंच रहे हैं जहां सार्वजनिक अपील की जरूरत है और यह स्थिति कारोबार की निरंतरता के लिए आफत लाने वाली है. इस संपादकीय के अनुसार बिजली और गैस के शुल्क में हाल ही की वृद्धि व्यवस्था में शासन की गंभीर कमी दर्शाती है. उसके हिसाब से अनदेखी के परिणाम लगातार स्पष्ट होते जा रहे हैं.

द नेशन ने अपने संपादकीय में लिखा है कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) ने अबतक कोई सबक नहीं सीखा है. सेना प्रमुख के सेवा विस्तार पर उच्चतम न्यायालय का फैसला चेताने वाला फैसला होना चाहिए. अखबार ने लिखा है कि पीटीआई संसद की अनदेखी नहीं कर सकती है और न ही उसे ऐसा करना चाहिए. बिजनस रिकाॅर्डर ने अपने संपादकीय में कहा कि किसी कारण, जो सरकार को ही पता होगा, से पाकिस्तान सरकार ने अवांछनीय जल्दबाजी दिखायी, 24 घंटे के नोटिस पर संसद के दोनों सदनों का सत्र बुलाया और उपयुक्त विधायी प्रक्रिया की अनदेखी की.

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