डॉ कायनात काजी
सोलो ट्रेवलर
कोझिकोड में नये साल की पूर्व संध्या का खूबसूरत माहौल वहां जाने के लिए हमें उत्साहित करता है. पूरा शहर नव वर्ष के स्वागत में सज जाता है. यहां के लोग नव वर्ष का स्वागत करने बीच पर जमा होते हैं. कोझिकोड बीच से खुले आसमान में आतिशबाजी देखना बहुत सुहाना अनुभव है. कोझिकोड हाल ही में एक बेहद खास न्यू ईयर डेस्टिनेशन के रूप में उभरा है. खूबसूरत बीच, वाइल्ड लाइफ, एडवेंचर एक्टिविटी, चर्च, मंदिर और मार्केट और कुदरत के दिलकश नजारे, सब हैं यहां.
कालीकट कहें या कोझीकोड, केरल का यह तीसरा बड़ा शहर है. कालीकट का नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा होने के पीछे एक कारण है वास्को डी गामा का इस धरती तक पहुंचना और यूरोप के लिए भारत तक पहुंचने का समुद्री मार्ग खोलना. कालीकट ऐतिहासिक पोर्ट सिटी है, जिसका इतिहास संगम साहित्य में भी मिलता है.
केरल का मालाबार क्षेत्र कई सभ्यताओं का घर है. यहां कई सुंदर बीच हैं, जिसमें कोझिकोड बीच प्रमुख है. कोझीकोड समुद्र तट कोझीकोड शहर के पास स्थित है. यहां का बीच पहचाना जाता है लकड़ी के खंभों की कतार से, जो समुद्र के बीच खड़े हैं और वे सौ साल पुराने हैं. इस समुद्र तट पर लाइटहाउस, मरीन वॉटर एक्वेरियम और लायंस पार्क भी हैं. यह लाइटहाउस 1907 में ब्रिटिश हुकूमत ने बनवाया था. यह समुद्र तट सूर्योदय या सूर्यास्त का आनंद लेने के इच्छुक लोगों के लिए आदर्श स्थान है.
आप भी इसे देखना चाहते हैं, तो कोझिकोड से कुछ किमी दूर कप्पड़ बीच पहुंच जाइए. इसका ऐतिहासिक महत्व है, यहां सरकार द्वारा स्थापित एक पत्थर का शिलालेख है, जिस पर खुदा हुआ है- ‘वास्को डी गामा लैंडिंग, वर्ष 1498’.
यहां एक ऐतिहासिक तालाब है, जिसे यहां के राजा जमोरिन ने 14वीं शताब्दी में आम लोगों की पानी की जरूरतों के लिए बनवाया था. इसी तालाब के नजदीक एक बड़ा पार्क है, जिसे मानांचिरा पार्क कहा जाता है. मानांचिरा स्क्वायर के नजदीक स्थित ताली मंदिर कोझिकोड के सबसे पुराने और शहर के जाने-माने मंदिरों में गिना जाता है. इसकी स्थापत्य कला केरल के पारंपरिक वास्तुकला पर आधारित है.
यहां के लोगों में इस मंदिर की बड़ी मान्यता है, जिसका निर्माण 14वीं शताब्दी में राजा जमोरिन ने करवाया था. यहां के लोग इस मंदिर के शिवलिंग को महर्षि परशुराम द्वारा स्थापित शिवलिंग मानते हैं. कोझीकोड शहर का सबसे मशहूर बाजार है, एसएम स्ट्रीट. इस बाजार में घूमते हुए आपको दीवारों पर कोझिकोड की समृद्ध संस्कृति की जानकारी वाले ढेरों पेंटिंग दिखेंगी.
एक ओर कोझिकोड जहां ऐतिहासिक स्थल है, वहीं वेस्टर्न घाट के कुछ नायाब नजारे भी हैं. यहां शहर के नजदीक ही इको टूरिज्म का एक शानदार स्पॉट है. एक पर्वत है, जिसे मालाबार की गवी कहा जाता है. इस हिल टॉप पर एक स्थान है, जिसे वायलाड व्यू पॉइंट के नाम से जाना जाता है.
यह समुद्र तल से लगभग 567 मीटर की ऊंचाई पर और कोझीकोड शहर से 38 किमी दूर है. इस व्यू पॉइंट पर खड़े होने पर दूर तक फैली हरी-भरी वादियां मन मोह लेती हैं. अगर आप कैंपिंग का शौक रखते हैं, तो चांदनी रात में स्टार गेजिंग देखने का सुखद आनंद यहां से लिया जा सकता है. कितना सुहाना अनुभव है कि जब सनराइज हो और आपके पैरों तले बादल बिछे हों.
कोझिकोड से 48 किमी दूर एक स्थान है वडकरा, जो अपने खूबसूरत बीचों के लिए जाना जाता है. यहीं केरल सरकार ने राज्य के पारंपरिक हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़ने के लिए एक क्राफ्ट क्लस्टर की स्थापना की है.
कोझीकोड से मात्र 46 किमी उत्तर-पूर्व में एक वॉटरफॉल है. इरुवनजी नदी के ऊपर बने सस्पेंशन ब्रिज से इस वॉटरफॉल की खूबसूरती गजब ढाती है. मालाबार घर है कई पारंपरिक शास्त्रीय कलाओं का. इसमें थय्यम, कलारिपयाट्टू, मंगलामकाली, पुराकल्ली यक्षगान आदि कलाएं शामिल हैं. यहां मंदिरों में आज भी विशेष अवसरों पर इन नृत्य कलाओं का मंचन पूरी आस्था के साथ किया जाता है.
यक्षगान संगीत को 400 साल पुराना नृत्य ओपेरा माना जाता है. पुरक्कली एक पारंपरिक धार्मिक नृत्य है, जो कोलाथुनाडु उत्तरी केरल के भगवती मंदिरों में नौ दिवसीय पूरम उत्सव के दौरान पुरुषों द्वारा किया जाता है. तो हो जाइए, नये साल का जश्न मनाने के लिए तैयार.
