कोलकाता : यदि आप पश्चिम बंगाल में ठाकुरनगर जाते हैं, तो वहां आपको पारिवारिक कलह राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिद्वंद्विता में तब्दील होता नजर आ सकता है. कोलकाता से करीब 63 किलोमीटर दूर भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित उत्तरी 24 परगना जिले का यह शहर बनगांव लोकसभा सीट का हिस्सा है. यह राज्य के उन छह संसदीय क्षेत्रों में एक है, जहां मतुआ समुदाय की बहुलता है.
बनगांव में चाची और भतीजे के बीच चुनावी जंग
कोलकाता : यदि आप पश्चिम बंगाल में ठाकुरनगर जाते हैं, तो वहां आपको पारिवारिक कलह राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिद्वंद्विता में तब्दील होता नजर आ सकता है. कोलकाता से करीब 63 किलोमीटर दूर भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित उत्तरी 24 परगना जिले का यह शहर बनगांव लोकसभा सीट का हिस्सा है. यह राज्य के उन […]

पिछले कुछ समय से अनुसूचित जाति मतुआ दो खेमों में बंट गयी है. हरिचंद गुरुचंद ठाकुर ने इस समुदाय की नींव डाली थी. परिवार (इस समुदाय) का एक खेमा तृणमूल कांग्रेस की सांसद ममता बाला ठाकुर का समर्थन करता है. ममता कपिल कृष्ण ठाकुर की विधवा हैं. कपिल कृष्णा ठाकुर मतुआ समुदाय के अग्रणी नेता और बड़ोमा बीणापाणि देवी के बेटे थे.
दूसरा खेमा बड़ोमा के दूसरे बेटे मंजुल कृष्णा ठाकुर के साथ खड़ा है. कृष्णा ठाकुर के बेटे शांतनु ठाकुर भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं. चिकनपाड़ा पंचायत के निवासी बरूण विश्वास ने कहा कि बीणापाणि की मार्च में मृत्यु के उपरांत दूरी और बढ़ी.
उन्होंने कहा : उनके बीच दूरी है, और यह धीरे-धीरे बिगड़ती जा रही है. हम कभी नहीं चाहते थे कि ऐसा हो. इससे मतुआ समुदाय पर असर पड़ रहा है और राजनीतिक दल फायदा उठा रहे हैं. शांतनु ठाकुर दावा करते हैं कि तृणमूल सांसद उनके परिवार की नहीं हैं. वह कहते हैं : मैं उन्हें नहीं जानता और नहीं पहचान सकता. वह महाराष्ट्र से हैं, न की बंगाल से.
उन्होंने कहा : वह ठाकुरबाड़ी (ठाकुर परिवार) के लिए कोई नहीं हैं. वह अवैध रूप से और जबरन हैं तथा सभी लाभ ले रही हैं. ममता बाला ठाकुर अपने पति के निधन के बाद 2015 में लोकसभा उपचुनाव जीती थीं. उन्होंने मंजुल कृष्णा ठाकुर के बड़े बेटे सुब्रत को हराया था जो भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे. बनगांव निर्वाचन क्षेत्र में 16,99,763 मतदाता हैं और इस सीट पर सोमवार को पांचवें चरण में मतदान होगा.