वर्तमान में महिलाओं में सबसे अधिक शिकायत ल्यूकोरिया की ही है. इसे ‘श्वेत प्रदर’ भी कहते है. इस रोग से किसी भी उम्र की महिलाएं पीड़ित हो सकती हैं. वास्तव में यह कोई अकेला रोग नहीं है. यह कई रोगों के कारण हो सकता है.
ल्यूकोरिया का अर्थ है- व्हाइट डिस्चार्ज. यह किसी एक बीमारी के कारण नहीं, बल्कि कई कारणों से हो सकता है. इसमें वजाइनल डिस्चार्ज महीने के कुछ दिनों में कुछ अधिक मात्र में होता है. पीरियड से कुछ दिन पूर्व, कुछ दिन बाद तथा पीरियड के 12-14 दिन पर, तो यह हॉर्मोन से प्रभावित होता है. इसके अन्य कारण निम्न हैं-
सर्वाइकल एक्टोपी : सर्विक्स (गर्भाशय का निचला हिस्सा) के फैलने से वहां से होनेवाला स्नव बढ़ जाता है. ऐसा आम तौर पर प्रसव के पश्चात अधिक होता है. यह समस्या समय के साथ सामान्य हो जाती है. यदि ऐसा नहीं होता है, तो बिजली की सिंकाई से इसका इलाज ता है.
वजाइनल इन्फेक्शन : वजाइनल डिस्चार्ज अधिकतर इन्फेक्शन के कारण होता है. ल्यूकोरिया को वजाइनल इन्फेक्शन के संकेत के रूप में भी देखा जा सकता है. दही जैसा सफेदडिस्चार्ज, खुजली, जलन होना आदि इसके मुख्य लक्षण हैं.
वजाइनल कैंडीडा इन्फेक्शन : यह डायबिटीज, प्रेगAेंसी या स्टेरॉयड के प्रयोग में अधिक होता है. यह फफूंद के कारण होता है. यह फ्लूकोनाजॉल की गोली और क्लोट्रिमाजॉल क्रीम से ठीक हो जाता है.
बैक्टीरियल वजीनोसिस : पतला सफेदडिस्चार्ज, जिसमें मछली जैसी महक होती है. इसका उपचार मेट्रोनिडाजॉल या क्लिंडामायसिन द्वारा होता है. इसमें पति का इलाज भी चलना चाहिए. सर्विक्स, यूटेरस और फेलोपियन ट्यूब के संक्रमण में भी पानी गिरने की शिकायत बढ़ जाती है. जांच में पेल्विक इन्फ्लेमेशन (सूजन) निकलता है, तो एंटीबायोटिक्स से उपचार होता है.
ट्राइकोमोनल वजीनाइटिस : इसमें भी पतला, फेनदार दरुगधयुक्त हरा या ग्रे डिस्चार्ज होता है. इसके अलावा खुजली और पेशाब में जलन भी अधिक होती है. यह मेट्रोनिडाजॉल के एक सप्ताह के कोर्स से ठीक हो जाता है. महिला यदि शादीशुदा है तो, साथ में पति का भी इलाज होना चाहिए अन्यथा इन्फेक्शन फिर से हो जाता है.
डॉ मीना सामंत
प्रसूति व स्त्री रोग विशेषज्ञ
कुर्जी होली फेमिली हॉस्पिटल, पटना
