पाकिस्तान के लाहौर में पुलिस और इस्लामिक विद्वान ताहिरुल कादिरी के समर्थकों को बीच हुए संघर्ष में कम से कम साल लोग मारे गए हैं.
ताहिरुल कादिरी के कार्यालय पर जमा हुए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले दागे. इस दौरान कई लोग घायल हुए.
ताहिरुल कादिरी के समर्थकों ने भी पुलिस पर पत्थर फेंके हैं.
खबरों के मुताबिक दंगों में दो महिलाएं मारी गई हैं. हालांकि, अब स्थिति नियंत्रण में हैं.
कादिरी फिलहाल कनाडा में रहते हैं और उनकी योजना अगले सप्ताह पाकिस्तान लौटने की है. वो पाकिस्तान में भ्रष्ट राजनेताओं के खिलाफ आंदोलन शुरू करने वाले हैं.
कादिरी के तेवर
कादिरी ने कनाडा से वीडियोलिंक के जरिए एक प्रेस कांफ्रेंस कर लाहौर स्थित अपने मुख्यालय पर हुई पुलिसिया कार्रवाई की निंदी की.
उन्होंने कहा कि वो इस तरह की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और वो योजना के मुताबिक ही सोमवार को इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे.
उन्होंने अपने समर्थकों से विरोध प्रदर्शन जारी रखने, लेकिन शांति बनाए रखने और संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाने के लिए कहा.
कादिरी ने कहा, "जिस क्रांति को आने में समय लगना था वो अब अधिक तेजी से होगी. ये मौतें सरकार के अंत की वजह बनेंगी."
कादिरी का असर
बीती साल जनवरी में उन्होंने इस्लामाबाद में एक जुलूस निकाला था, लेकिन इस विरोध का कोई खास नतीजा नहीं मिल सका.
बीबीसी संवाददाता एम इलियास खान ने इस्लामाबाद से बताया कि कादिरी को कई लोग एक ऐसा राजनीतिक आंदोलनकारी मानते हैं जिनमें रसूख का अभाव है.
लेकिन उनमें अपने मदरसों से प्रदर्शनकारियों को जमा करने की क्षमता है और ऐसी अफवाहें भी हैं कि खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ उनका समझौता है.
लाहौर में पुलिस का कहना है कि कादिरी की अगुआई वाली पार्टी पाकिस्तान आवामी तहरीक के समर्थनों ने सोमवार की रात मॉडल टाउन में अपने नेता के कार्यालय के बाहर लगे बैरियर को हटाने की कोशिश की. उनकी इस कार्रवाई को रोकने पर संघर्ष शुरू हो गया.
पुलिस ने कई गिरफ्तारियां भी की हैं.
पुलिस की आलोचना
शहर के जिन्ना अस्पताल के डॉक्टर अब्दुल रऊफ ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "हमें सात शव मिले हैं, जिसमें दो महिलाएं हैं. इन सभी को गोलियां लगी हैं."
उन्होंने बताया, "हमारे पास 80 घायल भी आए हैं. इसमें से 40 गोलियों से घायल हुए हैं, जबकि अन्य 40 को दूसरी वजहों से चोट आई है."
बीबीसी संवाददाता ने बताया कि कुछ लोगों ने कादिरी के समर्थकों पर इस तरह भारी बल प्रयोग के लिए आधिकारियों की आलोचना भी की है.
अधिकारियों का कहना है कि बैरियर वहां चार साल से अधिक समय से हैं और उन्हें सुरक्षा में सुधार के लिए उस इलाके के निवासियों की सहमति से लगाया गया है.
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