ट्विटर के जरिये हो रही हैं कई शिकायतें दूर

ट्विटर और अन्य सोशल साइट्स के जरिये कंपनियां अपने ग्राहकों के ज्यादा नजदीक पहुंच गयी हैं. अब ग्राहक भी कंपनियों को ट्विटर और फेसबुक के जरिये अपनी समस्या बता सकते हैं. एक वक्त था जब किसी कंपनी से शिकायत करने का एकमात्र जरिया कड़े शब्दोंवाला पत्र होता था, लेकिन अब ट्विटर आपकी शिकायत को कतार […]

ट्विटर और अन्य सोशल साइट्स के जरिये कंपनियां अपने ग्राहकों के ज्यादा नजदीक पहुंच गयी हैं. अब ग्राहक भी कंपनियों को ट्विटर और फेसबुक के जरिये अपनी समस्या बता सकते हैं. एक वक्त था जब किसी कंपनी से शिकायत करने का एकमात्र जरिया कड़े शब्दोंवाला पत्र होता था, लेकिन अब ट्विटर आपकी शिकायत को कतार में सबसे पहले पहुंचाने का बेहतरीन जरिया बन रहा है.

ब्रिटेन में जब एंजी कोनराड ने ये ट्वीट किया कि वे जिस ट्रेन से सफर कर रही हैं, उसमें हीटिंग बंद है, तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उस ट्रेन के ऑपरेटर इस बारे में ड्राइवर को सूचना देंगे और इस तरह ट्रेन की हीटिंग फिर से शुरू हो जायेगी और उनका बाकी का सफर आराम से कटेगा. कॉमेडियन और सोशल मीडिया एक्सपर्ट डेविड श्नेडर कहते हैं कि ट्विटर के जरिये कंपनियां अपने ग्राहकों के साथ बेहतर रिश्ते बना रही हैं. जब किसी ग्राहक को कोई शिकायत हो, तो ये शिकायतें जल्दी निपटाने का भी सबसे बढ़िया जरिया है.

निजी पुट अहम

डेविड कहते हैं, ‘अगर आपका फोन कॉल कतार में 29वें नंबर पर है, तो इस बारे में सिर्फ आप ही जानते हैं और वे जानते हैं, जिन्होंने आपको होल्ड पर रखा है, लेकिन अगर आप ट्वीट करते हैं, तो इसका सबको पता चलेगा, इससे प्रचार मिल सकता है और मुङो लगता है कि कंपनियां इस बारे में जागरूक हैं.’

एक खराब समीक्षा या नकारात्मक टिप्पणी को कई लाख लोग रि-ट्वीट कर सकते हैं और कंपनियां ट्विटर जैसी जगह पर अकसर ग्राहकों के गुस्से को न बढ़ने देने में यकीन रखती हैं. अगर ये सब चतुराई से किया जाये, तो ये कंपनी के पक्ष में जा सकता है. अगर किसी शिकायत को निजी पुट दिया जाये, तो ये भी ट्विटर पर वायरल हो सकती है. उदाहरण के लिए ब्रितानी रिटेलर आर्गोस के एक ग्राहक सेवा प्रतिनिधि ने ग्राहक को उनकी ही भाषा में जवाब दिया और इसे कुछ ही घंटों में 1,500 से ज्यादा बार रि-ट्वीट कर दिया गया. इंस्टीट्यूट ऑफ कस्टमर सर्विस की चीफ एग्जीक्यूटिव जो कॉसन का कहना है कि उपभोक्ता बहुत ज्यादा व्यावहारिक समझ रखने लगे हैं और वे कंपनियों से उम्मीद करते हैं कि उनके साथ सिर्फ लेन देनवाला व्यवहार न हो.

कॉसन कहती हैं, ‘बदलती दुनिया में हम जो अहम बातें देख रहे हैं, वे ये हैं कि हम कंपनियों से बेहतर संवाद चाहते हैं.’ कम्युनिकेशन एजेंसी फिशबर्न हेजेस एंड इको रिसर्च ने अप्रैल, 2012 में 2,000 लोगों के एक सर्वे में पाया कि 36 प्रतिशत लोग किसी बड़ी कंपनी से संपर्क साधने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 65 प्रतिशत का कहना था कि ये कॉल सेंटर से ज्यादा बेहतर है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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