बीजिंग : चीन ने जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सीमा पार से गोलीबारी रोकने के लिए 2003 के संघर्षविराम समझौते का पालन करने के भारत और पाकिस्तान के फैसले का स्वागत किया. चीन ने उम्मीद जतायी कि दोनों देश उपयुक्त तरीके से अपने मतभेद सुलझायेंगे.
भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान के महानिदेशकों (डीजीएमओ) ने 29 मई को हॉटलाइन पर बातचीत के दौरान जम्मू कश्मीर में सीमा पार से गोलीबारी रोकने के लिए 2003 के संघर्षविराम समझौते का पालन करने पर सहमति जतायी. चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया, हम दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक कदम की सराहना करते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि दोनों पक्ष वार्ता और विचार-विमर्श के जरिये अपने विवाद सुलझा सकते हैं और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता कायम रख सकते हैं.’ नयी दिल्ली में रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस साल 29 मई तक संघर्षविराम उल्लंघन की कुल 908 घटनाएं हुई, जबकि पिछले साल 860 घटनाएं हुई थी.
गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियानों के महानिदेशक (डीजीएमओ) विगत 29 मई को 2003 के संघर्ष विराम समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर सहमत हुए थे. भारतीय थल सेना के अनुसार, दोनों सैन्य कमांडरों ने हॉटलाइन पर बातचीत के दौरान जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की थी. विशेष हॉटलाइन संपर्क की पहल पाकिस्तानी डीजीएमओ ने की थी. भारत के डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान और पाकिस्तान के मेजर जनरल साहिर शमशाद मिर्जा के बीच बातचीत के बाद दोनों सेनाओं ने समान बयान जारी कर कहा था कि दोनों देश 15 साल पुराने संघर्ष विराम समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर सहमत हुएथे. साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया कि दोनों ओर से संघर्ष विराम का उल्लंघन ना हो.
वहीं, इस्लामाबाद से प्राप्त खबर के मुताबिक पाकिस्तान थल सेना की मीडिया शाखा इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन (आईएसपीआर) ने एक बयान में कहा गया था है कि दोनों शीर्ष सैन्य अधिकारियों के बीच एक विशेष हॉटलाइन संपर्क स्थापित किया गया. बयान में कहा गया था कि दोनों डीजीएमओ ने नियंत्रण रेखा और ‘वर्किंग बाउंड्री’ पर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की. शांति सुनिश्चित करने के लिए और सीमा पर बाशिंदों को पेश आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए वे मौजूदा स्थिति को बेहतर करने के लिए गंभीर कदम उठाने को लेकर भी सहमत हुए. वे 2003 के संघर्षविराम समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर सहमत हुए. उन्होंने संयम बरतने और मौजूदा तंत्र के जरिए मुद्दे का हल करने का भी फैसला किया. बयान में कहा गया है कि दोनों डीजीएमओ इस बात पर भी सहमत हुए कि कोई मुद्दा उठने पर संयम रखा जायेगा और उस विषय का हॉटलाइन संपर्क तथा स्थानीय कमांडरों की फ्लैग मीटिंग के मौजूदा तंत्र के जरिए हल किया जायेगा.
