पाकिस्तान को अमेरिका से फिर मिला झटका, आतंकवाद के खिलाफ मिलनेवाले फंड में करेगा कटौती

वाशिंगटन : अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपिओ ने गुरुवारको कहा कि पाकिस्तान को 2018 में बेहद कम धनराशि दी गयी है और अगले साल इसमें और कटौती की जा सकती है. अमेरिका ने पाकिस्तान पर अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे आंतकवादी गुटों को अपनी सीमा में पनाह देने और उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई […]

वाशिंगटन : अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपिओ ने गुरुवारको कहा कि पाकिस्तान को 2018 में बेहद कम धनराशि दी गयी है और अगले साल इसमें और कटौती की जा सकती है.

अमेरिका ने पाकिस्तान पर अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे आंतकवादी गुटों को अपनी सीमा में पनाह देने और उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुए उसे दी जानेवाली 1.15 अरब अमेरिकी डॉलर की सुरक्षा सहायता पर जनवरी में रोक लगा दी थी. पाकिस्तान के खिलाफ यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट के बाद उठाया गया जिसमें उन्होंने पाकिस्तान पर 15 वर्ष में 33 अरब डॉलर की अमेरिकी सहायता के बदले आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने और अमेरिका को केवल धोखा देने और झूठ बोलने का आरोप लगाया था. पोंपिओ सांसद डाना रोहराबाचेर ने प्रश्न का जवाब दे रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को पाकिस्तान को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता तब तक रोक देनी चााहिए जब तक कि वह डॉक्टर शकील आफरीदी को रिहा नहीं कर देता. शकील वह चिकित्सक हैं जिन्होंने ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में छिपे होने के सबूत दिये थे.
उन्होंने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी को बताया, ‘पाकिस्तान के मामले में हमने 2018 में बेहद कम धनराशि दी है और शेष बची धनराशि को जारी करने पर विचार किया जा रहा है. मेरा अनुमान है कि यह राशि भी कम ही रहेगी.’ रोहराबाचेर ने कहा कि अगर पाकिस्तान अफरीदी को अब भी जेल में रखता है तो पाक को आर्थिक सहायता देने का कोई कारण नहीं है. पोंपिओ ने कहा कि सीआईए के निदेशक के रूप में उन्होंने अफरीदी के मुद्दे पर काफी काम किया था, लेकिन उसमें उन्हें सफलता नहीं मिली. उन्होंने कहा, यकीन मानिये कि ये मेरे दिल में हैं, मैं जानता हूं कि यह महत्वपूर्ण है और हम यह कर सकते हैं. हम वह परिणाम पा सकते हैं. इस पर सांसद ने कहा कि पाकिस्तान में हालात बदतर होते जा रहे हैं. पोंपिओ ने कहा कि आर्थिक सहायता के अलावा अमेरिका को पाकिस्तान में अपने राजनयिकों के साथ हुए सलूक को भी ध्यान रखना चाहिए.

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