सिंधु जल समझौता : किशनगंगा व रातले प्रोजेक्ट पर पाक काे झटका, विश्व बैंक से भारत को मिली हरी झंडी

वाशिंगटन : विश्व बैंक ने बुधवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान 1960 के सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन में मतभेदों के बारे में चर्चा के लिए अगले महीने एक और दौर की बातचीत करेंगे. अगले दौर की बातचीत से पहले विश्व बैंक ने संधि पर संबंधित रुखवाली ‘फैक्ट शीट’ जारी की जिसके तहत भारत […]

वाशिंगटन : विश्व बैंक ने बुधवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान 1960 के सिंधु जल संधि के क्रियान्वयन में मतभेदों के बारे में चर्चा के लिए अगले महीने एक और दौर की बातचीत करेंगे. अगले दौर की बातचीत से पहले विश्व बैंक ने संधि पर संबंधित रुखवाली ‘फैक्ट शीट’ जारी की जिसके तहत भारत को झेलम और चेनाब नदियों की सहायक नदियों पर कुछ शर्तों के साथ पनबिजली विद्युत संयंत्रों के निर्माण की अनुमति दे दी गयी है.

विश्व बैंक ने एक संक्षिप्त बयान में कहा, ‘संबंधित पक्षों ने बातचीत जारी रखने और सितंबर में फिर से मिलने पर सहमति जतायी है.’ उसने इस संदर्भ में ब्योरा प्रदान नहीं किया. आईडब्ल्यूटी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव स्तर की बातचीत खत्म होने पर मंगलवारको जारी एक ‘फैक्ट शीट’ में कहा गया है कि पाकिस्तान किशनगंगा (330 मेगावॉट) और रातले (850 मेगावॉट) पनबिजली विद्युत संयंत्रों के निर्माण का विरोध कर रहा है. जम्मू कश्मीर में इन संयंत्रों का निर्माण भारत कर रहा है. गौरतलब है कि दोनों संयंत्रों के तकनीकी डिजाइन संधि के प्रतिकूल है या नहीं, इस बात को लेकर दोनों देश असहमत हैं. इस संदर्भ में आईडब्ल्यूटी ने इन दोनों नदियों और सिंधु को ‘पश्चिमी नदियां’ घोषित किया है, जिसका पाकिस्तान असीमित इस्तेमाल कर सकता है.

‘फैक्ट शीट’ में विश्व बैंक ने कहा है, ‘अन्य इस्तेमालों के साथ-साथ भारत संधि के अनुलग्नक में शामिल शर्तों को ध्यान में रखते हुए इन नदियों पर पनबिजली विद्युत संयंत्र का निर्माण कर सकता है.’ बैंक ने कहा कि आईडब्ल्यूटी के तकनीकी मुद्दों को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सचिव-स्तरीय बातचीत ‘सद्भावना और सहयोग’ के माहौल में हुई.

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