कुश्ती फेडरेशन का कामकाज संभालने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित, भूपेंद्र सिंह बाजवा अध्यक्ष बनाए गए

खेल मंत्रालय ने ओलंपिक संघ को पत्र लिखकर यह कहा था कि वे कुश्ती फेडरेशन का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए कमेटी गठित करे, ताकि खेल की गतिविधि बाधित ना हो और उसे आसानी से चलाया जा सके.

भारतीय ओलंपिक संघ ने कुश्ती फेडरेशन का कामकाज चलाने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है. यह कमेटी एड हाॅक बेसिस पर काम करेगी. इस कमेटी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह बाजवा होंगे, जबकि सदस्य के रूप में एमएम सौम्या और मंजूषा कंवर को शामिल किया गया है. इस कमेटी का गठन संघ ने इसलिए किया है क्योंकि कुश्ती फेडरेशन की मान्यता खेल मंत्रालय ने रद्द कर दी थी. खेल मंत्रालय ने ओलंपिक संघ को पत्र लिखकर यह कहा था कि वे कुश्ती फेडरेशन का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए कमेटी गठित करे, ताकि खेल की गतिविधि बाधित ना हो और उसे आसानी से चलाया जा सके.

पिछले एक साल से विवादों में हैं कुश्ती संघ

गौरतलब है कि कुश्ती संघ पिछले एक साल से लगातार विवादों में है. जनवरी के महीने में कुछ महिला पहलवानों जिनमें साक्षी मलिक और विनेश फोगाट का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया, इन्होंने संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाया था और उन्हें पद से हटाने के लिए विरोध प्रदर्शन किया था. पहलवानों के प्रदर्शन में कई पुरुष पहलवान जिनमें बजरंग पुनिया भी हैं, वे शामिल हुए. पहलवानों के प्रदर्शन का मामला जब ज्यादा बड़ा हुआ तो बृज भूषण सिंह ने इस्तीफा दे दिया था. उसे बाद 21 दिसंबर को कुश्ती संघ के लिए चुनाव हुए और यह चुनाव तब विवादों में आया जब नए अध्यक्ष संजय सिंह पर यह आरोप लगा कि वे बृजभूषण शरण सिंह के करीबी हैं और उनके ही फैसलों को अमल में लेकर आ रहे हैं.

साक्षी मलिक ने संन्यास की घोषणा की

संजय सिंह की नियुक्ति के बाद साक्षी मलिक ने संन्यास की घोषणा कर दी और कुछ पहलवानों ने पुरस्कार वापसी की बात भी कही. बजरंग पुनिया ने अपना पद्मश्री लौटा दिया था. इन तमाम विरोध के बाद संघ को खेल मंत्रालय ने 24 दिसंबर को भंग कर दिया और नई कमेटी गठित करने को कहा, जिसमें एक महिला सदस्य को भी शामिल करने को कहा गया.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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