कौन हैं सोनम वांगचुकी की पत्नी गीतांजलि अंगमो? सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

Geetanjali J Angmo : 24 सितंबर को जब लेह-लद्दाख में युवाओं का प्रदर्शन उग्र हुआ तो अनशन पर बैठे उनके नेता सोनम वांगचुक ने हिंसा को गलत बताते हुए अपना अनशन समाप्त कर दिया और यह कहा कि उन्हें लद्दाख के लोगों को उनका हक दिलवाना है, लेकिन हिंसा उनका रास्ता नहीं है. उसके कुछ ही बाद सरकार ने सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर लिया. अब उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो सामने आईं हैं और कह रही हैं कि उनके पति पर लगाए गए तमाम आरोप मनगढ़त हैं. सरकार लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल नहीं करना चाह रही है, इसलिए वो झूठे आरोप लगा रही है. पाकिस्तान की यात्रा करने पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से जलवायु पर केंद्रित यात्रा थी, क्योंकि वहां हिमालय के ग्लेशियर पर बात हो रही थी.

Geetanjali J Angmo : लेह-लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर जो अशांति हुई उसमें 4 युवकों की मौत हुई थी. इस अशांति के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों के नेता सोनम वांगचुक को गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया है. सरकार ने सोनम वांगचुक पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया जिसकी वजह से लद्दाख में हिंसा हुई. सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो सामने आई हैं और उन्होंने यह कहा है कि उनके पति पर जो भी आरोप लगाए गए हैं, वे सभी मनगढ़ंत हैं. उन्होंने कोई भी ऐसा काम नहीं किया है, जिसकी वजह से उन्हें गिरफ्तार किया जाए. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया है कि वो लद्दाख के लोगों की मांग जिसमें लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग शामिल है, उसे दरकिनार करने के लिए यह सबकुछ कर रही है.

कौन हैं गीतांजलि अंगमो?

गीतांजलि अंगमो

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि एक सोशल एक्टिविस्ट और शिक्षाविद हैं. वे हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स, लद्दाख (HIAL) की सीईओ भी हैं. वर्तमान में वो लद्दाख में शिक्षा और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में सक्रिय हैं. गीतांजलि का जन्म ओडिशा के बालासोर में हुआ है. उन्होंने विज्ञान विषय में स्नातक की पढ़ाई की है. उसके बाद उन्होंने जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए की डिग्री ली है. उसके बाद उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया है .

बाद में वो सामाजिक कार्यों से जुड़ गईं और कई प्रोजेक्ट्‌स पर काम किया और संस्थाएं बनाईं. 2017 में उन्होंने अपने पति के साथ हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स की स्थापना की और उसका पूरा कार्यभार संभाल रही हैं. HIAL की खासियत यह है कि विश्वविद्यालय पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से अलग तरीकों से बच्चों को शिक्षा देता है. यहां अनुभव आधारित शिक्षण को ज्याद महत्व दिया जाता है.

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कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं गीतांजलि

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जहां एक ओर सामाजिक कार्यकर्ता हैं, वहीं दूसरी ओर वे कराटे भी करती हैं. उन्होंने कराटे में ब्लैक बेल्ट प्राप्त किया हुआ है. वे एक अच्छी डांसर हैं और आध्यात्मिक विषयों में उनकी गहन रुचि भी है. वे ओडिशी नृत्यशैली की अच्छी डांसर हैं. भारतय दर्शन में गीतांजलिकी विशेष रुचि है. वे वेद और उपनिषेद में भी बहुत रुचि रखी हैं. उन्हें सरकार ने Women Transforming India Award से सम्मानित किया है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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