Ujjwal Nikam : उज्ज्वल देवराज निकम कसाब से ऐसे हैं जुड़े, अब राज्यसभा के लिए मनोनीत

Ujjwal Nikam Rajya Sabha : उज्ज्वल देवराव निकम, पूरा नाम. पिता का नाम देवरावजी निकम, मां का नाम विमलादेवी, गांव जलगांव. उम्र 72 साल. राज्यसभा के सदस्य के रूप में मनोनीत हुए हैं. उज्ज्वल निकम ने मुंबई हमले के दोषी कसाब को मौत की सजा तक पहुंचाने के लिए बेहतरीन दलीलें दी और सफल रहे. उन्होंने शक्ति मिल्स रेप केस में पीड़िता की आवाज को बुलंद किया और दोषी को सजा दिलाई. गुलशन कुमार मर्डर केस और प्रमोद महाजन की हत्या मामले में दोषी को सजा दिलाने में वरिष्ठ अधिवक्ता उज्जवल निकम की खास भूमिका रही है.

Ujjwal Nikam Rajya Sabha : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा में चार व्यक्तियों को सांसद के रूप में मनोनीत किया है. इनके नाम है पूर्व राजनयिक हर्ष श्रृंगला, वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम, इतिहासकार मीनाक्षी जैन और केरल के शिक्षक सी सदानंद मास्टर. इस संबंध में शनिवार 12 जुलाई को अधिसूचना जारी की गई है. ये चारों नाम अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गज हैं और अब राज्यसभा में अपना योगदान देंगे. इन चारों नाम में एक नाम पर सबकी नजर टिकी है और वह है उज्ज्वल निकम.

कसाब को फांसी की सजा तक पहुंचाने वाले हैं उज्ज्वल निकम

उज्ज्ल निकम अपने पेशे में श्रेष्ठ हैं. उन्होंने एक वकील के रूप में अपने करियर में एक से एक हाई प्रोफाइल केस लड़े और दोषी को सजा दिलवाई है. ऐसे तो उनके सभी केस खास हैं, लेकिन कुछ केस ऐसे हैं, जिन्हें भूल पाना संभव नहीं है. 26/11 मुंबई आतंकी हमले के एकमात्र जीवित दोषी कसाब को उन्होंने फांसी तक पहुंचाया. इस केस में वे मुख्य सरकारी वकील थे. प्रमोद महाजन की हत्या मामले में उनके छोटे भाई प्रवीण महाजन को आजीवन कारावास की सजा भी उज्ज्वल निकम ने ही दिलवाई, क्योंकि वही केस की पैरवी कर रहे थे. हालांकि उज्ज्वल निकम ने प्रवीण महाजन के लिए फांसी की सजा मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने आ जीवन कारावास की सजा सुनाई. 2013 के शक्ति मिल्स रेप केस, 20
16 के कोपर्डी रेप केस में भी उज्ज्वल निकम ने दोषियों के खिलाफ केस लड़ा और उन्हें सजा दिलाई. गुलशन कुमार का केस भी उन्होंने ही लड़ा था.

उज्ज्वल निकम का बायोडाटा देखिए

उज्ज्वल निकम का जन्म 30 मार्च 1953 को महाराष्ट्र के जलगांव में हुआ है. इनके पिता देवरावजी निकम अधिकवक्ता और जज थे. मां एक गृहिणी थी. उज्ज्वल निकम की प्रारंभिक शिक्षा जलगांव से ही हुई है. उन्होंने विज्ञान से स्नातक की डिग्री ली है, उसके बाद उन्होंने जलगांव के ही केसीई सोसाइटी के एसएस मनियार लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल की. उज्ज्वल निकम ने अपने करियर की शुरुआत जिला अभियोजक के रूप में जलगांव से की है. उन्होंने अपने करियर में 628 लोगों को आजीवन कारावास और 37 को फांसी की सजा दिलवाई है. उन्हें 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया है. देश के वरिष्ठ वकीलों में उनकी गणना की जाती है. 2024 में उन्होंने बीजेपी के टिकट पर मुंबई मुंबई नॉर्थ सेंट्रल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन वे हार गए थे.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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