टोक्यो ओलंपिक 2020 में भारत को वेटलिफ्टिंग में सिल्वर मेडल दिलाने वाली मीराबाई चानू पुलिस विभाग में बहुत जल्द महत्वपूर्ण पद संभालेंगी. दरअसल मणिपुर सरकार ने मीराबाई को पुलिस विभाग में Additional Superintendent of Police (Sports) का पद देने की घोषणा की है. इसकी जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गयी है.
मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने सोमवार को घोषणा की कि टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाली वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को राज्य पुलिस विभाग में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में नियुक्त किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उन्हें एक करोड़ रुपये का इनाम भी देगी.
भारत लौटने पर मीराबाई का एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत
टोक्यो ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में रजत पदक जीतकर मीराबाई चानू भारत लौट आयी हैं. भारत लौटने पर उनका एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत किया गया. भारत लौटने के बाद संवाददाताओं के साथ बातचीत में मीराबाई ने कहा, मेरे लिए ये बहुत ही चुनौतीपूर्ण था. उन्होंने उनका और उनके कोच का ओलंपिक में मेडल जीतने का सपना था. चानू ने कहा, रियो ओलंपिक में मेरा मेडल चूक गया था, उस के बाद हमने पूरी मेहनत की. रियो ओलंपिक से मैंने बहुत कुछ सीखा.
वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कहा, हमने 5 साल त्याग करके टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीतने के लिए बहुत मेहनत की. हमारा सपना पूरा हुआ है. इधर भारत में भव्य स्वागत से खुशी चानू ने ट्वीट किया और अपने फैन्स को इसके लिए धन्यवाद कहा.
गौरतलब है कि टोक्यो ओलंपिक 2020 में मीराबाई चानू ने 21 साल बाद भारत के लिए पदक जीता. मीराबाई चानू ने 49 किलो वर्ग में रजत पदक पर कब्जा जमाया. उनकी विजयी मुस्कान ने उन सभी आंसुओं की भरपाई कर दी जो पांच साल पहले रियो में नाकामी के बाद उनकी आंखों से बहे थे.
मणिपुर की 26 साल की भारोत्तोलक ने कुल 202 किग्रा (87 किग्रा + 115 किग्रा) उठाकर रजत पदक जीता. इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी के 2000 सिडनी ओलंपिक में भारत के लिए कांस्य पदक जीता था.
भारत लौटने के साथ सबसे पहले गांव जाएंगी मीराबाई
भारत लौटने के साथ ही मीराबाई चानू अपने गांव जाएंगी. जैसा की उन्होंने टोक्यो में पदक जीतने के बाद कहा था. रजत जीतने के बाद उन्होंने बताया था कि वो दो साल से अपने गांव नहीं जा पायीं हैं, इसलिए भारत लौटते ही वो सबसे पहले अपना गांव जाना चाहेंगी.
मालूम हो मीराबाई को अपने गांव और देश से गहरा लगाव है. इसलिए वो जहां भी जाती हैं, हमेशा अपने साथ देश की मिट्टी रखती हैं. इसके अलावा अपने गांव का ही चावल विदेश दौरे पर खाती हैं.
