नक्सली वारदात पर गढ़वा के रमकंडा में पुलिस ने ऐसे लगाया ब्रेक

रमकंडा (मुकेश तिवारी) : नक्सली संगठनों द्वारा ठेकेदारों से लेवी वसूलने के लिए वाहन जलाने, अपहरण एवं हत्या की वारदात को अंजाम देने को लेकर कुख्यात रहा गढ़वा जिले का सुदूरवर्ती क्षेत्र रमकंडा के लिये वर्ष 2020 सुखद रहा. बीते वर्षों में जहां नक्सली और अपहरण की घटनायें आम होती थीं. रमकंडा-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग के तेलमरवा घाटी के पास राहगीरों से दो पहिया वाहनों से लूटपाट की घटनायें अक्सर होती रहती थीं, लेकिन पुलिस प्रशासन की सजगता के कारण वर्ष 2020 में इन घटनाओं पर ब्रेक लग गया.

रमकंडा (मुकेश तिवारी) : नक्सली संगठनों द्वारा ठेकेदारों से लेवी वसूलने के लिए वाहन जलाने, अपहरण एवं हत्या की वारदात को अंजाम देने को लेकर कुख्यात रहा गढ़वा जिले का सुदूरवर्ती क्षेत्र रमकंडा के लिये वर्ष 2020 सुखद रहा. बीते वर्षों में जहां नक्सली और अपहरण की घटनायें आम होती थीं. रमकंडा-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग के तेलमरवा घाटी के पास राहगीरों से दो पहिया वाहनों से लूटपाट की घटनायें अक्सर होती रहती थीं, लेकिन पुलिस प्रशासन की सजगता के कारण वर्ष 2020 में इन घटनाओं पर ब्रेक लग गया.

हालांकि बीते वर्षों की अपेक्षा सड़क दुर्घटना के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है. रमकंडा क्षेत्र के लोगों के लिये जाते-जाते इस वर्ष के अंतिम महीने में बिराजपुर मोड़ के समीप सड़क दुर्घटना में एक की मौत के साथ ही एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना से क्षेत्र के लोग स्तब्ध रहे. दो वर्ष पूर्व 30 मई 2018 की रात जहां माओवादी संगठन के सशस्त्र दस्ते ने पांच वर्षों बाद रमकंडा थाना क्षेत्र के बिराजपुर व भंडरिया थाना क्षेत्र के रोदो में स्थित बीड़ी पत्ता के खलिहानों में आग लगाते हुये लेवी के लिये रमकंडा-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग के निर्माण में लगे हाइवा वाहनों को जलाने की घटना को अंजाम दिया था.

Also Read: IRCTC/Indian Railways : ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ कम करने के लिए रेलवे ने इन दो फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों का किया अवधि विस्तार, पढ़िए लेटेस्ट अपडेट

वर्ष 2015 में नक्सलियों द्वारा रमकंडा में पदस्थापित कनीय अभियंता चंद्रशेखर पांडेय का अपहरण कर लिये जाने की बड़ी घटना हुई थी. इसके साथ ही वर्ष 2017 में स्वास्थ्य विभाग के बीपीएम सुधीर कुमार का भी रमकंडा-मेदिनीनगर मुख्य मार्ग के तेलमरवा घाटी से अपहरण की घटना से रमकंडा क्षेत्र में दहशत फैल चुका था, लेकिन धीरे-धीरे प्रशासन की सजगता से ऐसी घटनाओं में कमी आने लगी. सरकार का नक्सलियों के विरुद्ध अभियान और प्रशासन की सजगता का परिणाम रहा की वर्ष 2020 में इस तरह की घटनाओं की संख्या शून्य रही.

दुष्कर्म, मारपीट, दुर्घटना, डायन बिसाही के मामले सामने आते रहे. वहीं प्रशासन ने भी इन मामलों में कार्रवाई करते हुये आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा. विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 में चार अपहरण, वर्ष 2013 में दो नक्सली, वर्ष 2014 में एक नक्सली व दो अपहरण, वर्ष 2015 में 9 नक्सली व पांच अपहरण सहित वर्ष 2016 में पांच नक्सली की घटनायें हुई. वहीं वर्ष 2017 में महज एक नक्सली व दो अपहरण, वर्ष 2018 में चार नक्सली व चार अपहरण की घटनायें हुई, लेकिन धीरे-धीरे इन घटनाओं में कमी आने लगी. वहीं वर्ष 2019 में महज तीन अपहरण व दो नक्सली घटनायें हुई थी, लेकिन वर्ष 2020 में इन घटनाओं की पुनरावृत्ति नही हो सकी. इसके साथ ही इस क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय उग्रवादी संगठन टीपीसी, टीपीसी टू व माओवादियों की धमक पूरी तरह से समाप्त हो गयी. हालांकि अभी भी उग्रवादी संगठन जेजेएमपी जिले के रमकंडा, भंडरिया, बड़गड़ सहित पलामू के रामगढ़ व चैनपुर थाना क्षेत्रों में अभी भी सक्रिय हैं.

Also Read: झारखंड के तीन मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने दिया ये आश्वासन

इस संबंध में थाना प्रभारी रामकृष्ण सिंह ने बताया कि पुलिस प्रशासन की सजगता के साथ ही ग्रामीणों के सहयोग का ही परिणाम रहा कि इन घटनाओं में कमी आयी है. वहीं प्रशासन अपराध की घटनाओं को रोकने के लिये प्रयासरत है. गांवों में फैली सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है.

Posted By : Guru Swarup Mishra

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >