शनिवार को मीन राशि में गोचर करेंगे सूर्य, खरमास में नहीं होंगे कोई शुभ कार्य, …जानें कब खत्म होगा खरमास?

13 अप्रैल को खत्म होगा खरमास, Kharmas to end on April 13

ज्योतिष गणना के अनुसार सूर्य प्रत्येक राशि में पूरे एक महीने या 30 से 31 दिन के लिए रहता है. 12 महीनों में सूर्य ज्योतिष की 12 राशियों में प्रवेश करता है. 12 राशियों में भ्रमण करते हुए जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उस स्थिति को खरमास कहते हैं. सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने पर सभी शुभ कार्य एक महीने के लिए बंद हो जाते हैं. साल में दो बार ऐसा समय आता है, जब सूर्य की राशि में प्रवेश करने पर शुभ कार्य बंद हो जाते हैं.

मीन राशि की संक्रांति 14 मार्च, 2020 शनिवार को दिन में एक बजकर 46 मिनट से प्रवेश करेगी. इसी के साथ खरमास शुरू हो जायेगा, फिर एक माह तक खरमास प्रारंभ हो जायेगा एवं शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त समाप्त हो जायेंगे. शनिवार की संक्रांति एवं मंगलवार की अमावस्या दैवी-प्राकृतिक उपद्रव पैदा कर धन-जन को उपद्रव पहुंचा सकते हैं.

कब से कब तक रहेगा खरमास

पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल, 2020 बुधवार को सूर्य रात्रि 10 बजकर 28 मिनट से मेष राशि में गोचर करेगा, तभी से विवाह, गृहप्रवेश आदि मांगलिक कार्य भी दोबारा शुरू हो जायेंगे.

खरमास प्रारंभ : 14 मार्च, 2020, शनिवार प्रातः 01:46 बजे

खरमास समाप्त : 13 अप्रैल, 2020, बुधवार रात्रि 10:28 बजे

खरमास में नहीं करने चाहिए ये काम

खरमास में कोई मांगलिक कार्य जैसे शादी, गोदभराई, सगाई, बहू का गृह प्रवेश, गृह प्रवेश, गृह निर्माण, नये व्यापार का आरंभ आदि करना अच्छा नहीं माना जाता है. खरमास में नया घर, नयी कार की खरीदारी भी नहीं करनी चाहिए. खरमास के समय किसी के साथ विवाद में नहीं उलझना चाहिए. मांस-मदिरा के सेवन से परहेज करना चाहिए. खरमास की अवधि में यदि कोई भिखारी या जरूरतमंद दरवाजे पर आ जाये, तो उसे खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए.

क्या नर्क में जाता है, खरमास में मरनेवाला

मान्यता है कि खरमास में यदि कोई प्राण त्याग करता है, तो उसे निश्चित तौर पर नर्क में निवास मिलता है. इसका उदाहरण महाभारत में भी मिलता है, जब भीष्म पितामह मृत्युशैया पर लेटे रहे, लेकिन खरमास के कारण वे अपने प्राण इस माह नहीं त्यागे. जैसे ही सूर्य संक्रांति समाप्त हुई, भीष्म पितामह अपने प्राण त्याग दिये.

खरमास में क्यों शुभ कार्य होते हैं वर्जित?

इस दौरान सूर्य गुरु की राशि में रहता है, जिस वजह से गुरु का प्रभाव भी कम हो जाता है और मांगलिक कार्यों के सिद्ध होने के लिए गुरु का प्रभावशाली होना नितांत आवश्यक होता है. बृहस्पति ही वैवाहिक जीवन का सुख और संतानदायी माने जाते हैं. मान्यता है कि खरमास के दौरान विवाह संस्कार कराने से नुकसान उठाना पड़ सकता है. उस समय ग्रहों का इतना दुष्प्रभाव माना जाता है कि ग्रहों के दुष्प्रभाव के कारण शादीशुदा दंपत्ति का अलगाव हो सकता है अथवा रिश्ते में बहुत ज्यादा तनाव उत्पन्न होने की स्थिति भी आ सकती है.

खरमास के दौरान अपनाने चाहिए ये उपाय

खरमास के महीने में भागवत गीता, श्रीराम की पूजा, कथा वाचन और विष्णु भगवान की पूजा करना शुभ माना जाता है. दान, पुण्य, जप और भगवान का ध्यान लगाने से कष्ट दूर हो जाते हैं. इस माह में भगवान शिवशंकर की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है. शिवजी के अलावा मलमास में भगवान विष्णु की पूजा भी फलदायी मानी जाती है.

खरमास में “गोवर्धनधरवन्देगोपालं गोपरूपिणम् गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिकाप्रियम्” मंत्र का जाप करना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि पीले वस्त्र धारण करके इस मंत्र का जप करना और भी लाभदायी होता है. खरमास में पूजा और हवन के साथ दान करने से भी पुण्य मिलता है.

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Published by: Kaushal kishor

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