2050 : दुनिया में सबसे अधिक मुसलमान भारत में होंगे, इतनी होगी अलग-अलग धर्मों के मानने वालों की आबादी

Religion Wise Population In World : पूरी दुनिया में हिंदू धर्म को प्राचीन धर्मों में से एक माना जाता है, लेकिन इसके मानने वाले पूरी दुनिया की जनसंख्या का महज 15 प्रतिशत है. ईसाई धर्म को मानने वाले दुनिया में सबसे ज्यादा है और इस्लाम तेजी से बढ़ने वाला धर्म है, जिसे मानने वाले अभी पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर हैं. 1945 से अबतक ईसाई धर्म विश्व में नंबर वन रहा है, लेकिन अब इस्लाम उसकी बराबरी करने वाला है.

Religion Wise Population In World : विश्व में विभिन्न धर्मों के मानने वाले हैं और अगर जनसंख्या की दृष्टि से देखा जाए तो पूरी दुनिया में सबसे अधिक संख्या ईसाइयों की है. उसके बाद विश्व का सबसे नया धर्म माना जाने वाला इस्लाम है. हिंदू धर्म जनसंख्या के मामले में तीसरे नंबर पर आता है. जनसंख्या में वृद्धि के दृष्टिकोण से देखें तो माना जा रहा है कि 21वीं शताब्दी के अंत तक दुनिया में इस्लाम सबसे बड़ा धर्म होगा.

विश्व में कौन–कौन से धर्म हैं मौजूद

वर्तमान समय की बात करें तो अभी विश्व में 300 से अधिक धर्म हैं, लेकिन जिन लोगों की संख्या ज्यादा है, उनमें ईसाई, मुसलमान, हिंदू, यहूदी, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी धर्म . इसके अलावा भी कुछ धर्म  हैं, जिनपर बात होती है जैसे वुडू धर्म. वुडू धर्म की उत्पत्ति अफ्रीका में हुई है और यह धर्म आत्मा और पूर्वजों में विश्वास करता है. इसके अलावा एक अन्य धर्म है जो 19 शताब्दी में अस्तित्व में आया है और जिसका सार यह है कि सभी धर्मों का मूल एक ही है.

किस धर्म के अनुयायी लगातार बढ़ रहे हैं?

विश्व में इस्लाम के अनुयायियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है और 2050 तक उनकी आबादी अभी की दोगुनी जाएगी. www.statista.com के अनुसार विश्व की कुल आबादी लगभग 800 करोड़ है, जिसमें से 31.6 प्रतिशत ईसाई, 25.8 मुसलमान और 15.1 प्रतिशत हिंदू के रूप में ये तीन धर्म सबसे ऊपर थे. लेकिन मुसलमानों की आबादी में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप 2050 तक विश्व में मुसलमान और ईसाइयों की आबादी लगभग बराबर हो जाएगी. मुसलमानों की आबादी में वृद्धि का सर्वप्रमुख कारण उच्च प्रजनन दर होगा. मुसलमानों की आबादी में 73 प्रतिशत युवा होंगे.

2050 तक पूरी दुनिया में सबसे अधिक मुसलमान भारत में होंगे

 प्यू रिसर्च के अनुमानों के अनुसार 2050 तक विश्व में सबसे अधिक मुसलमान भारत में होंगे. चौंकाने वाला एक आंकड़ा यह भी है कि अमेरिका में ईसाइयों की संख्या घटेगी और मुसलमान आबादी अमेरिका में सबसे ज्यादा हो जाएगी. 2050 तक दुनिया की आबादी 9.3 बिलियन यानी नौ करोड़ से अधिक हो जाएगी और इसमें मुसलमानों की आबादी 30% और ईसाइयों की 31 प्रतिशत होगी. यह इतिहास में पहली बार होगा कि मुसलमान पूरी दुनिया के 30 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करेंगे. बौद्धों की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं होगा, लेकिन बाकी सभी धर्म के लोगों की जनसंख्या बढ़ेगी. हिंदुओं की आबादी में 34 प्रतिशत की वृद्धि होगी, लेकिन इसका दायरा भारत, नेपाल और माॅरिशस जैसे देशों तक ही सीमित रहेगा. हिंदुओं की आबादी 104 करोड़ तक हो सकती है. भारत में हिंदू बहुसंख्यक ही रहेंगे, लेकिन विश्व में सर्वाधिक मुसलमान 2050 तक भारत में होंगे और इंडोनेशिया इस सूची में भारत से पिछड़ जाएगा.

विश्व के किस देश में है सबसे अधिक मुसलमानों की संख्या

इंडोनेशिया242,700,000
पाकिस्तान 240,760,000
भारत200,000,000
बांग्लादेश 150,800,000
नाइजीरिया97,000,000
मिस्र90,000,000
तुर्की 84,400,000
ईरान82,500,000
चीन50,000,000
अल्जीरिया43,737,096

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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