पीएम मोदी ने कहा-कांग्रेस सिर्फ घोषणाएं करने में विश्वास रखती थी, हमने योजनाओं को लागू किया

PM Modi : पीएम मोदी ने कांग्रेस की सरकारों पर फिर हमला किया और कहा कि कांग्रेस खुद को सिर्फ शासन करने के लिए बना मानती है. वे कभी जनता का हित नहीं चाहती हैं.

PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खजुराहो में कांग्रेस पार्टी और उनकी सरकारों पर हमले का सिलसिला जारी रखते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार घोषणाएं करने में माहिर थीं, लेकिन लोगों को उसका लाभ कभी नहीं मिला. पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में शिलान्यास के 30-35 साल बाद भी योजनाएं पूर्ण नहीं हुईं हैं. जब प्रधानमंत्री बनने के बाद मैं इन योजनाओं का हश्र देखता हूं तो मुझे आश्चर्य होता है.

कांग्रेस की नीयत में खोट है : पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में विकास योजनाओं का हश्र इसलिए इस तरह का हुआ, क्योंकि कांग्रेस की नीयत ही ऐसी थी. वे योजनाओं की घोषणाएं वोट के लिए करते थे, लेकिन उसे पूरा कभी नहीं किया. हमने कई ऐसी घोषणाएं की, जिनका लाभ आम लोगों को घोषणा के साथ ही मिल रहा है. किसान सम्मान निधि इसी तरह की एक योजना है. आज देश में इस सम्मान से हजारों किसानों को लाभ मिल रहा है.

जलसंरक्षण की सोच बाबा साहेब की थी

पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती है जल सुरक्षा. इस कालखंड में वही देश आगे बढ़ पाएगा जिसके पास पर्याप्त जल और पर्याप्त जल प्रबंधन होंगा. उन्होंने कहा खेत-खलिहान तभी समृद्ध होंगे जब जल होगा, उद्योग-धंधे तभी फलेंगे-फूलेंगे जब जल होगा. उन्होंने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के तहत बांध का उद्घाटन किया गया है. इससे लगभग 11 लाख हेक्टेयर भूमि तक नल से जल पहुंचेगा. हमारी सरकार ने जल सुरक्षा के लिए पर्याप्त और जरूरी प्रयास किया है.

जलसंरक्षण के लिए बाबा साहेब के प्रयास अनमोल

पीएम मोदी ने कहा कि देश में जल संसाधनों की रक्षा के लिए बाबा साहेब आंबेडकर ने सर्वाधिक प्रयास किए.लेकिन कांग्रेस ने कभी भी बाबा साहेब को जल संरक्षण का श्रेय नहीं दिया. जलसंरक्षण के लिए बाबा साहेब के प्रयास अनमोल हैं. पीएम मोदी ने खजुराहो में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती के अवसर पर डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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