VIDEO : महेंद्र सिंह धोनी ने पैतृक गांव जाकर की कुल देवता की पूजा, साक्षी संग लिया परिजनों का आशीर्वाद

महेंद्र सिंह धोनी अल्मोड़ा अपने कुल देवता की पूजा के लिए गए थे. यहां उन्होंने कुछ समय अपनी पत्नी साक्षी के साथ बिताया. साथ ही वे घर और मुहल्ले के बुजुर्गों से भी मिले. इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है.

विश्व कप 2023 का फाइनल मुकाबला 19 नवंबर को अहमदाबाद में खेला जाना है. इसी बीच भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हाल ही में अपने पैतृक गांव जो उत्तराखंड में स्थित है, वहां गए. महेंद्र सिंह धोनी अपनी पत्नी साक्षी धोनी के साथ गांव गए थे और वहां उन्होंने पूजा अर्चना की. पूजा के बाद महेंद्र सिंह धोनी ने अपने गांव के लोगों से मुलाकात की और उनके साथ बेहतरीन समय बिताया. महेंद्र सिंह धोनी का पैतृक गांव उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है. हालांकि महेंद्र सिंह धोनी के पिता पान सिंह नौकरी के लिए झारखंड की राजधानी रांची आ गए थे और रांची में ही महेंद्र सिंह धोनी का जन्म हुआ और यहीं वे पले-बढ़े हैं.

कुल देवता की पूजा के लिए गए थे धोनी

महेंद्र सिंह धोनी अल्मोड़ा अपने कुल देवता की पूजा के लिए गए थे. यहां उन्होंने कुछ समय अपनी पत्नी साक्षी के साथ बिताया. साथ ही वे घर और मुहल्ले के बुजुर्गों से भी मिले. इस मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है. वीडियो में महेंद्र सिंह धोनी बहुत ही सहजता और विनम्रता के साथ अपने लोगों से मिल रहे हैं और उनके पैर छूकर उनसे आशीर्वाद ले रहे हैं.


माही और साक्षी ने लिया बुजुर्गों का आशीर्वाद

वीडियो में वे पैतृक आवास में साक्षी के साथ पूजा करते नजर आ रहे हैं, उसके बाद वे एक बुजुर्ग महिला के साथ छत पर बैठते हैं, जिसके बाद कई महिलाएं वहां आती हैं और उनके साथ तस्वीर खिंचवाती है. धोनी यहां अपने घर के दरवाजे पर बैठकर साक्षी के साथ तस्वीर भी खिंचवाते हैं, जो वायरल है.


देवड़ी मंदिर में पूजा करने जाते हैं धोनी

महेंद्र सिंह धोनी दीपावली के मौके पर अपने घर रांची में थे, जहां उन्होंने अपने परिवार के साथ दिवाली का जश्न मनाया. उसके बाद वे अपने पैतृक गांव अल्मोड़ा गए हुए हैं और वहां बेहतर समय गुजार रहे हैं. महेंद्र सिंह धोनी की पूजा-अर्चना में काफी निष्ठा है, वे रांची से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित देवड़ी मंदिर में हमेशा ही जाकर पूजा करते हैं.

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Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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