Kurmi Protest: झारखंड में कुड़मी आंदोलन से कई ट्रेनें रद्द, व्यापार प्रभावित, मांगों पर अड़े आंदोलनकारी

Kurmi Protest: कुड़मी को अनुसूचित जाति (एसटी) में शामिल करने समेत अन्य मांगों को लेकर कुड़मी समाज का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा. झारखंड के बहरागोड़ा, बरसोल, चाकुलिया और घाटशिला अनुमंडल इस आंदोलन से काफी प्रभावित है. रेलवे ट्रैक और हाईवे जाम रहने से व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है.

कुड़मी को अनुसूचित जाति (एसटी) में शामिल करने समेत अन्य मांगों को लेकर कुड़मी समाज का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा. पश्चिम बंगाल से सटे झारखंड के बहरागोड़ा, बरसोल, चाकुलिया और घाटशिला अनुमंडल इस आंदोलन से काफी प्रभावित है. पश्चिम बंगाल के खेमासोली में रेलवे ट्रैक और लोधासोली में हाईवे जाम से व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है. इससे सैकड़ों ट्रकों में मछलियां, सब्जियां, फूल, दूध 3 दिन से जाम में फंसे होने के कारण बर्बाद हो गए हैं. झाड़ग्राम जिला बंधक बना हुआ है. इस जिले में घुसने का हर मार्ग अवरुद्ध है.

रेलवे के साथ-साथ हाईवे को भी आंदोलनकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया है. झाड़ग्राम के पास लोधासोली हाईवे 3 दिनों से जाम है. इस अनिश्चितकालीन जाम के कारण झाड़ग्राम घुसने का कोई मार्ग नहीं बचा. इससे यहां का व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो गया है. कुड़मी समाज की मुख्य मांगें कुड़मी को एसटी का दर्जा देने, कुड़माली भाषा को मान्यता देने और सरना धर्म कोड को लागू करना हैं.

झाड़ग्राम में प्रतिदिन मछलियां, दूध, सब्जी समेत अन्य सामान आते हैं, जो 3 दिनों से नहीं आ रहे हैं. इससे व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ा है. दुर्गा पूजा में झारखंड-बंगाल सीमावर्ती इलाकों में अच्छा व्यवसाय होता है. जाम से व्यापारी त्रस्त हैं. कुड़मी समाज अपनी मांगों से समझौता करने के मूड में नहीं है. पुलिस बल प्रयोग से पीछे हट रही है. हर दिन जाम में लोग परेशान हैं.

जाम के कारण तीसरे दिन खड़गपुर टाटा मेन रूट की सभी ट्रेनें रद्द रहीं. हजारों लोग प्रभावित हैं. सबसे अधिक प्रभाव सब्जी, फूल, दूध, छेना के व्यापारियों पर पड़ा है.

दुर्गा पूजा के पूर्व इस तरह के बड़े आंदोलन से झारखंड-बंगाल सीमावर्ती इलाकों में अर्थव्यवस्था चौपट हो गयी है. कपड़े और जूते के व्यापारी कोलकाता से व्यापार नहीं कर पा रहे हैं.

रिपोर्ट : मो परवेज, घाटशिला, पूर्वी सिंहभूम

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लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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