IRCTC Fake App से रहें सावधान, कंपनी ने जारी की ट्वीट के माध्यम से वॉर्निंग

IRCTC Fake App: आईआरसीटीसी ने अपने ग्राहकों को ऐप के बारे में चेतावनी देते हुए एक मेल भेजा है. अगर आप एक Android यूजर हैं, तो इस फर्जीवाड़े का शिकार हो सकते हैं. आइए जानते हैं क्या है फेक IRCTC App की असली कहानी.

IRCTC Fake App: इंडियन रेलवे केटरिंग ऐंड टूरिजम कॉर्पेशन (IRCTC) ने एंड्रॉइड स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए एक चेतावनी दी है. भारत सरकार के स्वामित्व वाली संस्था ने उपयोगकर्ताओं को एक नकली एंड्रॉइड ऐप अभियान के बारे में चेतावनी दी है. यह अभियान नकली आईआरसीटीसी ऐप डाउनलोड करने के लिए फिशिंग लिंक भेजकर एंड्रॉइड उपयोगकर्ताओं को टार्गेट करता है. आईआरसीटीसी ने अपने ग्राहकों को ऐप के बारे में चेतावनी देते हुए एक मेल भेजा है. इसने यूजर्स को माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर पर चल रहे खतरनाक अभियान के बारे में भी चेतावनी दी है.


आईआरसीटीसी ने ट्वीट करके कही ये बात

आईआरसीटीसी के एक ट्विट में लिखा है “प्रिय ग्राहक, यह बताया गया है कि एक दुर्भावनापूर्ण और नकली मोबाइल ऐप अभियान प्रचलन में है, जहां कुछ धोखेबाज बड़े पैमाने पर फ़िशिंग लिंक भेज रहे हैं और आम नागरिकों को धोखाधड़ी गतिविधियों में फंसाने के लिए उपयोगकर्ताओं को नकली ‘आईआरसीटीसी रेल कनेक्ट’ मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.”

Also Read: IRCTC Tour Package: आईआरसीटीसी दे रहा है चंडीगढ़, शिमला, मनाली घूमने का मौका, मिलेगी ये सुविधाएं

यूजर्स को दी को सलाह

उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे आईआरसीटीसी ऐप को केवल आधिकारिक ऐप स्टोर, गूगल प्ले स्टोर और ऐप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें. इसमें आगे कहा गया है कि लोगों को किसी भी संदिग्ध दिखने वाले लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए या उन संदेशों पर ध्यान नहीं देना चाहिए जो उन्हें दिए गए लिंक के जरिए ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं.

सलाह में कहा गया है, “लोगों को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे धोखेबाजों के शिकार न बनें और गूगल प्ले (Google Play Store) या एप्पल एप स्टोर (Apple App Store) से केवल आईआरसीटीसी के आधिकारिक रेल कनेक्ट मोबाइल ऐप का उपयोग करें.”

उपयोगकर्ताओं से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट Care@irctc.co.in या आईआरसीटीसी ग्राहक सेवा हॉटलाइन पर करने का भी आग्रह किया जाता है, जिसका संपर्क विवरण आधिकारिक आईआरसीटीसी वेबसाइट (www.irctc.co.in) पर उपलब्ध है. आईआरसीटीसी ने भी इस साल अप्रैल में अपने सभी उपयोगकर्ताओं के लिए इसी तरह की सलाह जारी की थी, जिसमें उपयोगकर्ताओं से irctcconnect.apk नामक एक संदिग्ध एंड्रॉइड एप्लिकेशन डाउनलोड न करने के लिए कहा गया था.

आईआरसीटीसी ने कहा कि इस दुर्भावनापूर्ण ऐप को व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा है. आईआरसीटीसी ने कहा कि यदि उपयोगकर्ता उल्लिखित एपीके फाइल इंस्टॉल करते हैं, तो यह उनके मोबाइल फोन को इंफेक्ट कर सकता है. इसमें कहा गया है कि लोगों को दुर्भावनापूर्ण ऐप इंस्टॉल करने के लिए जालसाज व्यक्तिगत जानकारी जैसे यूपीआई विवरण और अन्य बैंकिंग जानकारी प्राप्त करने की कोशिश कर रहे हैं.

IRCTC के नकली ऐप्स को कैसे पहचानें?

इस मामले में IRCTC ने फर्जी मोबाइल ऐप का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया था. हालांकि, कुछ कस्टमर्स नकली ऐप को असली समझकर डाउनलोड भी कर सकते हैं. कुछ बातों का ध्यान रखकर आप नकली ऐप को पहचान सकते हैं.

  • IRCTC ऐप को Google Play Store या Apple App Store जैसे ऑफिशियल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें.

  • वॉट्सऐप या मैसेज के जरिए मिले किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक ना करें. आमतौर पर कोई भी सरकारी कंपनी ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक शेयर नहीं करती है.

  • ऑफर्स और डिस्काउंट मैसेज के झांसे में ना आएं. इस तरह के मैसेज ज्यादातर जालसाज़ी के लिए होते हैं.

  • रियल ऐप डेवलपर्स स्पेलिंग मिस्टेक नहीं करते हैं. डाउनलोड करने से पहले उसके नाम और डिस्क्रिप्शन की जांच कर लें.

  • ऐप स्टोर पर डेवलपर का नाम भी लिस्ट होता हैं. उनके बारे में जानकारी जानने के लिए डेवलपर का नाम गूगल करें.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >