ओलंपिक रद्द होगा या नहीं IOC ने फैसला WHO पर छोड़ा

IOC अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थामस बाक ने गुरुवार को कहा कि coronavirus महामारी को देखते हुए तोक्यो ओलंपिक को रद्द या स्थगित करने के मामले में आईओसी WHO (आईओसी) की सिफारिशों का पालन करेगी.

बर्लिन : अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थामस बाक ने गुरुवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए तोक्यो ओलंपिक को रद्द या स्थगित करने के मामले में आईओसी विश्व स्वास्थ्य संगठन (आईओसी) की सिफारिशों का पालन करेगी.

जर्मन टेलीविजन एआरडी को दिये गये साक्षात्कार में बाक ने कहा कि आईओसी फरवरी के मध्य से ही इस मामले को लेकर डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों के संपर्क में है. उन्होंने कहा, ‘‘हम डब्ल्यूएचओ की सलाह का अनुसरण करेंगे. ” बाक ने इसके साथ ही जोड़ा कि आईओसी अब भी तोक्यो में सफल खेलों के तैयारियों पर काम कर रही है. कोरोना वायरस को रोकने के लिए अधिकतर देशों ने कड़े कदम उठाये हैं जिसके कारण कई ओलंपिक क्वालीफायर्स रद्द करने पड़े हैं और बाक ने भी माना कि क्वालीफाइिंग प्रतियोगिताओं को लेकर गंभीर समस्या है.

उन्होंने कहा, ‘‘यहां हमें लचीला रवैया अपनाना होगा. प्रतियोगिताओं को स्थगित करके या क्वालीफिकेशन मानदंडों में बदलाव करके ऐसा किया जा सकता है.” बाक ने कहा कि विशेषकर कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित देशों के खिलाड़ियों को इन मुश्किल परिस्थितियों में उचित क्वालीफिकेशन देना जरूरी है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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