फिलिस्तीनियों के पक्ष में सोशल मीडिया पोस्ट लिखने पर फंसे मोहम्मद रिजवान, हुए ट्रोल

पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम ने रिजवान की टिप्पणी से दूरी बना ली है. मोहम्मद रिजवान ने सोशल एक्स पर पोस्ट लिखा और गाजा पर इजराइल के हमले के बाद फैली तबाही के लिए प्रार्थना की और श्रीलंका के खिलाफ पाकिस्तान की जीत को फिलिस्तीनियों को समर्पित किया

-कुणाल किशोर-

ICC WORLD CUP: वर्ल्डकप का आगाज हो गया है और इसके साथ ही यह विवादों से भी घिर गया है. ताजा घटनाक्रम में पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान के सोशल मीडिया पोस्ट से मचा हंगामा है. रिजवान ने अपने पोस्ट में फिलिस्तीन का समर्थन किया है और 9 अक्टूबर को हुए पाकिस्तान बनाम श्रीलंका के मुकाबले में पाकिस्तान की जीत को फिलिस्तीनियों को समर्पित किया है.

X पर लोगों का गुस्सा फूटा

मोहम्मद रिजवान के सोशल मीडिया पोस्ट से लोगों में आक्रोश फैल गया और इसके बाद लोगों ने उन्हें जमकर लताड़ा. पाकिस्तान की जानी-मानी पत्रकार आरजू काजमी ने लिखा कि आपको शर्म आनी चाहिए कि आप हमास जैसे आतंकवादी संगठन का समर्थन करते हैं जिसने इजराइल में औरतों , बच्चों और बूढ़ों की जान ली. वरीष्ठ टीवी पत्रकार मानक गुप्ता ने रिजवान से पूछ डाला कि अभी तक आपने चीन के उइगर मुस्लिम के लिए क्यों शतक नहीं लगाया. वरीष्ठ खेल पत्रकार विक्रांत गुप्ता ने तो आईसीसी से ही पूछ डाला कि क्या इसकी अनुमति है , क्या क्रिकेटर्स आईसीसी इवेंट के दौरान धार्मिक और राजनीतिक टिप्पणी कर सकते हैं. उन्होंने आईसीसी को याद दिलाया कि कैसे धौनी के बलिदान बैज को उनके दस्ताने से हटाने के लिए बाध्य किया गया था. एक यूजर ने लिखा कि पाकिस्तान के खिलाड़ी सिर्फ ट्वीट ही कर सकते हैं अपनी मैच फीस दान में दे सकते हैं क्या? दूसरे यूजर ने रिजवान को अपना आंटा दान में देने की बात की .

आईसीसी ने किया हस्तक्षेप से इनकार

रिजवान के पोस्ट के बाद आईसीसी लोगों के निशाने पर आ गया जिसके बाद आईसीसी ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है. आईसीसी ने कहा कि ये मामला मैदान के बाहर हुआ है इसलिए आईसीसी इसमें कुछ नहीं कर सकता. आईसीसी ने गाइड लाइन का सख्त पालन करने को कहा जिसमें की खिलाड़ियों को टूर्नामेंटो के दौरान धार्मिक और राजनीतिक टिप्पणियों से बचने को कहा गया है.

कप्तान बाबर आजम ने भी झाड़ा पल्ला

पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम ने रिजवान की टिप्पणी से दूरी बना ली है. बाबर आजम से जब रिजवान के बयान के बारे में सफाई मांगी गई तो बाबर ने इस मामले पर कुछ बोलने से साफ इनकार कर दिया . उन्होंने कहा कि बेहतर यही होगा कि वो शनिवार 14 अक्टूबर को होने वाले भारत के खिलाफ बड़े मुकाबले की ओर ध्यान दें.

आखिर क्या है धोनी से जुड़ा मामला ?

2019 विश्व कप के पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ धोनी ने भारतीय सेना के पाराशूट रेजीमेंट के प्रतीक बलिदान बैज चिह्न वाले दस्ताने को पहनकर मैदान पर खेलने आए थे. आईसीसी ने इस दस्ताने के साथ उन्हें खेलने से रोक दिया था, जिसके बाद खासा विवाद हो गया था. आपको बता दें कि महेंद्र सिंह धोनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर हैं.

क्या है गाजा का मामला

दरअसल 7 अक्टूबर को आतंकवादी संगठन हमास ने इजाराइल पर हवाई और जमीनी हमला किया जिसमें लगभग 1300 लोगों की जान गई और 100 से अधिक लोगों को बंधक बना लिया गया. इसके जवाब में इजराइल ने गाजा पर हवाई हमले कर रहा जिसमें करीब 1900 लोगों की जान गई और लाखों लोगों को बेघर होना पड़ा है.

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लेखक के बारे में

Published by: Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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