बंगाल में चुनावी हिंसा: अब शिक्षाविदों ने राष्ट्रपति से की हस्तक्षेप की मांग, दिलीप घोष बोले- राज्य सरकार हिंसा पर मौन क्यों

सुप्रीम कोर्ट में 600 शिक्षाविदों की याचिका के बाद अब मामला भारत के राष्ट्रपति तक पहुंच गया है.

कोलकाता/नयी दिल्ली: बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा के मुद्दे पर न्याय की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. सुप्रीम कोर्ट में 600 शिक्षाविदों के द्वारा याचिका दाखिल किये जाने के बाद अब मामला भारत के राष्ट्रपति तक पहुंच गया है. शिक्षाविदों के एक समूह ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है.

दलित, जनजातीय और पिछड़ा वर्ग से आने वाले शिक्षाविदों के एक समूह ने बंगाल में कथित हिंसा में अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों को निशाना बनाये जाने के खिलाफ राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है.

दिल्ली विश्वविद्यालय के 115 शिक्षाविदों द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान में कहा गया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के इस बर्बर हिंसा से पीड़ित होने के कारण उसे अपने लुटे हुए घरों के पुनर्निर्माण और पुनर्वास, अनाथ बच्चों को जीवन का अधिकार, पूर्ण सुरक्षा व संरक्षण के साथ तत्काल प्रभाव से चिकित्सा व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराये जाने के आश्वासन की आवश्यकता है.

Also Read: बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के खिलाफ 600 से अधिक शिक्षाविद पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस के साथ मिलकर तृणमूल कांग्रेस के राज्य प्रायोजित कार्यकर्ताओं ने एससी/एसटी समुदाय को निशाना बनाने और हत्या, लूटपाट, दुष्कर्म व उनकी जमीन कब्जाने का काम किया. शिक्षाविदों ने आरोप लगाया कि दो मई को प्रदेश विधानसभा के नतीजे आने के बाद 11000 से ज्यादा लोग बेघर हो गये.

शिक्षाविदों ने कहा है कि बेघर हुए इन 11000 लोगों में अधिकतर अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से हैं. हिंसा की 1627 घटनाओं में 40 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए. ‘सेंटर ऑफ सोशल डेवलपमेंट’ के तत्वावधान में लिखे गये पत्र में शिक्षाविदों ने दावा किया कि 5000 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचाया गया.

Also Read: पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा: जान बचाने के लिए एक लाख लोगों को करना पड़ा पलायन, अब होगी ‘सुप्रीम’ सुनवाई

यह भी दावा किया गया है कि इस दौरान 142 महिलाओं पर अमानवीय अत्याचार हुए. एससी-एसटी समुदाय से आने वाले 26 लोगों की उपनगरीय इलाकों में मौत हुई. दो हजार से ज्यादा लोगों ने असम, ओड़िशा और झारखंड में शरण ले रखी है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने उस पर लगाये गये राजनीतिक हिंसा के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा पर सियासी मकसद से चुनाव बाद हिंसा के कुछ मामलों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया.

दिलीप घोष बोले- राज्य सरकार हिंसा के खिलाफ मौन क्यों

इधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि राज्य सरकार अपने वर्चस्व को कायम रखने के लिए वाममोर्चा सरकार के दौरान चलायी गयी हिंसा की राजनीति की परंपरा को आगे बढ़ा रही है. आज बंगाल की स्थिति ऐसी है कि यश महाचक्रवात के पीड़ितों की मदद के लिए भाजपा नेता व कार्यकर्ता जाते हैं, तो उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज हो जाती है.

Also Read: ममता बनर्जी ने औद्योगिक चैंबरों से कहा- पैसे और राहत सामग्री हमें दें, हम करेंगे टीकाकारण और राहत सामग्री का वितरण

जब उनसे पूछा गया कि यह कैसे कह सकते हैं कि हिंसा सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ही कर रही है, तो श्री घोष ने कहा कि अगर हिंसा व हत्याएं तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता नहीं कर रहे हैं, तो राज्य सरकार हिंसा के खिलाफ मौन क्यों है. उन्होंने कहा कि लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है.

उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद से भाजपा समर्थकों के घरों में तोड़फोड़, बमबाजी व उन पर अत्याचार के लगातार मामले सामने आ रहे हैं. तृणमूल सरकार समर्थित बदमाश इन घटनाओं को अंजाम नहीं दे रहे हैं. मुख्यमंत्री अपने ही राज्य के लोगों पर होने वाले अत्याचार व हत्या के खिलाफ चुप बैठी हुई हैं. राज्य की कानून-व्यवस्था को राज्य सरकार को सुदृढ़ करना होगा.

उन्होंने कहा कि हावड़ा के एक साइक्लोन सेंटर में जब उन्होंने कुछ प्रभावितों को तिरपाल बांटे, तो उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी गयी. ऐसे ही सिलीगुड़ी व अन्य कई जगहों के विधायकों को राहत कार्य करने से रोक दिया गया. अम्फान के दौरान भी लोगों की मदद करने पर भाजपा समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की गयी थी.

बंगाल में 35 से ज्यादा भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई

प्रभात खबर से बातचीत में दिलीप घोष ने बताया कि चुनाव परिणाम के बाद शीतलकुची में मिंटू बर्मन व मानिक मोइत्रा, दीनहाटा में हराधन राय, रानाघाट दक्षिण में उत्तम घोष, जगदल में शोभा रानी मंडल, बोलपुर में गौरव सरकार, केतुग्राम में बलराम माझी, मथुरापुर में सौरभ बर, भाटपाड़ा में आकाश यादव, मयूरेश्वर में जकीर हुसैन सहित 35 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गयी.

Also Read: वैक्सीनेशन ऑन व्हील्स: कोलकाता में बस को बनाया चलता-फिरता टीका केंद्र, ऐसे चलेगा टीकाकरण अभियान

Posted By: Mithilesh Jha

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >