छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव : मायावती की बसपा ने एक महिला समेत 9 उम्मीदवारों की सूची जारी की

छत्तीसगढ़ में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख करीब आ रही है, राजनीतिक सरगर्मी तेज हो रही है. मायावती की पार्टी बसपा ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है. पार्टी ने 9 उम्मीदवार उतार दिये हैं. जानें अन्य अपडेट्स.

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होना अभी बाकी है. लेकिन, राजनीतिक दलों ने अभी से चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने तो बाकायदा अपने उम्मीदवारों की भी घोषणा कर दी है. बसपा ने आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के लिए अपने नौ उम्मीदवारों की घोषणा की है. पार्टी के एक पदाधिकारी ने बुधवार (9 अगस्त) को यह जानकारी दी.

दाऊराम रत्नाकर समेत 9 इन लोगों को मिला टिकट

बसपा ने जिन लोगों को टिकट दिया है, उनमें पार्टी के वरिष्ठ नेता दाऊराम रत्नाकर, ओमप्रकाश वाजपेयी, राधेश्याम सूर्यवंशी, डॉक्टर विनोद शर्मा, श्याम टंडन, रामकुमार सूर्यवंशी और आनंद तिग्गा शामिल हैं. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत पोयाम ने बताया कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नौ उम्मीदवारों की सूची मंगलवार देर रात जारी की गयी, जिसमें एक महिला विधायक समेत दो मौजूदा विधायक शामिल हैं.

इन 9 लोगों को बसपा ने दिया टिकट

पोयाम ने बताया कि वर्तमान विधायक केशव प्रसाद चंद्रा जो जैजैपुर (सक्ती जिला) और इंदु बंजारे जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पामगढ़ (जांजगीर-चांपा जिला) विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें उनके संबंधित क्षेत्रों से चुनाव मैदान में उतारा गया है. सूची के अनुसार दाऊराम रत्नाकर (मस्तूरी सीट-अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), ओमप्रकाश बाचपेयी (नवागढ़- अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), राधेश्याम सूर्यवंशी (जांजगीर-चांपा), डॉक्टर विनोद शर्मा (अकलतरा), श्याम टंडन (बिलाईगढ़- अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), रामकुमार सूर्यवंशी (बेलतरा) और आनंद तिग्गा (सामरी-अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित) को पार्टी ने चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया है. 2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था.

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2018 में बसपा को मिले थे 4.27 फीसदी वोट

पिछले चुनाव में बसपा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में 4.27 प्रतिशत वोट प्राप्त किया था तथा दो सीटें- जैजैपुर और पामगढ़ में जीत हासिल की थी, जबकि उसके गठबंधन सहयोगी जेसीसी (जे) को 7.6 प्रतिशत वोट मिले थे. जेसीसी (जे) ने पांच सीटें हासिल की थीं. इस बार के चुनाव में इनमें से किसी भी दल ने अब तक गठबंधन की घोषणा नहीं की है.

नवंबर-दिसंबर में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव संभव

बता दें कि छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य में वर्ष 2018 से कांग्रेस का शासन है. इसके पहले 15 साल तक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने यहां शासन किया था. वर्ष 2018 के चुनाव में बीजेपी सिर्फ 15 सीटें ही जीत पायी थी. बता दें कि वर्ष 2003 और 2008 में बीजेपी ने 50-50 सीटें जीतीं थीं, जबकि वर्ष 2013 में उसे 49 सीटों पर जीत मिली. वर्ष 2018 में यह पार्टी सत्ताविरोधी लहर का शिकार हुई और 15 सीटों पर सिमट गयी.

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में अभी बसपा के दो विधायक

बसपा ने वर्ष 2003 और वर्ष 2008 में दो-दो सीटें जीतीं थीं, जबकि वर्ष 2013 में उसकी पार्टी को सिर्फ एक सीट पर जीत मिली थी. वर्ष 2018 में मायावती की बसपा को फिर 2 सीट पर जीत मिली. इस बार पार्टी इससे ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है. यही वजह है कि पार्टी ने सबसे पहले अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है.

कांग्रेस के 68 और बीजेपी के 15 विधायक

छत्तीसगढ़ की 90 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में बसपा के दो, बीजेपी के 15, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के 5 और कांग्रेस के 68 विधायक हैं. शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को वर्ष 2003 में एक सीट पर जीत मिली थी, लेकिन उसके बाद इस पार्टी को छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में कभी एक भी सीट पर जीत नहीं मिली.

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कांग्रेस और बीजेपी कर रही सरकार बनाने के दावे

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि ‍वर्ष 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियों को भरोसा है कि उनकी जीत होगी. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का दावा है कि उन्होंने पांच साल में जनता के लिए जो काम किये हैं, उसका असर दिखेगा. जनता के आशीर्वाद से वह दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे. कांग्रेस की सत्ता में वापसी होगी. वहीं, बीजेपी का दावा है कि छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार ने कोई काम नहीं किया है. जनता इस बार बीजेपी की ही सरकार बनायेगी.

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By Mithilesh Jha

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