CWG 2022: अमित पंघाल, जैसमीन और सागर सेमीफाइनल में, भारत के मुक्केबाजी में छह पदक पक्के

राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी प्रतिस्पर्धा में भारत के पदकों की संख्या में इजाफा होना जारी है. जिसमें पदार्पण करने वाले सागर अहलावत और जैसमीन नये सितारों के तौर पर उभरे जो अमित पंघाल के साथ गुरुवार को यहां अपने वर्ग की स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंच गये. यहां से भारत को 6 पदक पक्के हैं.

बर्मिंघम : राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी प्रतिस्पर्धा में भारत के पदकों की संख्या में इजाफा होना जारी है जिसमें सागर अहलावत भी अमित पंघाल और जैसमीन के साथ गुरुवार को यहां अपने वर्ग की स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंच गये. हरियाणा के 22 साल के सागर ने पुरुषों के सुपर हेवीवेट (+92 किग्रा) वर्ग के क्वार्टरफाइनल में सेशेल्स के केडी इवांस एग्नेस पर 5-0 की जीत से मुक्केबाजी रिंग में भारत के छह पदक पक्के कर दिये.

पंघाल ने शानदार खेला

इससे पहले गोल्ड कोस्ट में पिछले चरण के रजत पदक विजेता पंघाल ने फ्लाईवेट (48-51 किग्रा) क्वार्टर फाइनल में स्कॉटलैंड के लेनोन मुलीगन के खिलाफ सर्वसम्मत फैसले में जीत दर्ज की. फिर जैसमीन ने महिलाओं के लाइटवेट (60 किग्रा) वर्ग के क्वार्टर फाइनल में न्यूजीलैंड की ट्राय गार्टन को 4-1 के विभाजित फैसले में हराया. पंघाल और मुलीगन के बीच मुकाबला ज्यादा चुनौतीपूर्ण नहीं था.

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पंघाल ने मुलीगन को आराम से हराया

26 साल के भारतीय मुक्केबाज ने अपने से युवा स्कॉटिश प्रतिद्वंद्वी को अपने मजबूत रक्षण से थका दिया. पंघाल ने तेज तर्रार जवाबी हमले से बीच-बीच में अंक जुटाये. पहले दो राउंड में पंघाल ने ‘गार्ड डाउन’ (हाथ नीचे रखकर खेलते हुए) रखते हुए मुलीगन को आक्रामक होने के लिए उकसाया लेकिन फुर्ती से उनकी पहुंच से बाहर हो गये. बीच-बीच में उन्होंने बायें हाथ से मुक्के जड़कर 20 साल के प्रतिद्वंद्वी मुक्केबाज को पछाड़ा.

पंघाल को स्वर्ण पदक की उम्मीद

अंतिम राउंड में उन्होंने ‘वन-टू’ (एक के बाद एक) के संयोजन से मुक्के जड़े और राष्ट्रमंडल खेलों में अपना दूसरा पदक पक्का किया. निकहत जरीन (50 किग्रा), नीतू गंघास (48 किग्रा) और मोहम्मद हुसामुद्दीन (57 किग्रा) भी सेमीफाइनल में पहुंचकर अपने वर्गों में पदक पक्के कर चुके हैं. भारतीय मुक्केबाज मुकाबले से पहले आत्मविश्वास से लबरेज है. पंघाल ने कहा, मुझे स्वर्ण पदक जीतने का भरोसा है, विशेषकर इस प्रदर्शन के बाद. मैं अपनी सहनशक्ति और फुटवर्क पर काफी काम कर रहा हूं और काफी मजबूत भी महसूस कर रहा हूं. मैं जानता हूं कि मैं प्रत्येक मुकाबला जीत सकता हूं.

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