क्यों अब नए स्मार्टफोन्स में हेडफोन जैक नहीं मिलता? जानें कारण

Headphone Jack: स्मार्टफोन कंपनियां अब हेडफोन जैक हटाकर स्लिम डिजाइन, बड़ी बैटरी और एडवांस ऑडियो तकनीक को जगह दे रही हैं. वायरलेस ऑडियो, USB-C यूनिवर्सल पोर्ट और बेहतर वाटर-डस्ट प्रोटेक्शन भी इसके फायदे हैं.

Headphone Jack: पिछले दस सालों में स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों ने धीरे-धीरे 3.5mm हेडफोन जैक को अपनी डिवाइस से हटा दिया है. सबसे पहले इस बदलाव की शुरुआत Apple ने iPhone 7 के साथ की थी, जिसमें Lightning पोर्ट ही चार्जिंग और वायर्ड ऑडियो का काम करने लगा. धीरे-धीरे और कंपनियों ने भी इसका पालन किया. यूजर्स का कहना था कि ये सिर्फ लोगों को ईयरबड्स (earbuds) और वायरलेस हेडफोन खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है. लेकिन ट्रेंड रुका नहीं और आज बहुत कम स्मार्टफोन में ही हेडफोन जैक मिलता है. कंपनियों की तरफ से इसके पीछे कुछ कारण बताए जाते हैं. आइए जानते हैं उन कारणों को.

स्पेस की बचत

आपने देखा होगा कि आजकल के स्मार्टफोन काफी स्लिम और स्टाइलिश आते हैं. इसका एक बड़ा कारण है 3.5mm हेडफोन जैक को हटाना है. असल में, ये जैक हटाने से फोन के अंदर कीमती जगह बचती है. और ये जगह मैन्युफैक्चरर्स बड़ी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. जैसे कि बड़ी बैटरी, बेहतर कैमरा, या एडवांस्ड कूलिंग सिस्टम डालना.

वायरलेस ऑडियो को बढ़ावा देना

आज के समय में वायरलेस ऑडियो टेक्नोलॉजी, खासकर ब्लूटूथ, ने हमारी लाइफ को काफी आसान बना दिया है. अब हेडफोन या ईयरबड्स को सिर्फ एक क्लिक में कनेक्ट कर सकते हैं वो भी बिना किसी झंझट वाले तार के. वायरलेस ऑडियो आपको पूरी आजादी देता है, चलते-फिरते भी म्यूजिक का मजा ले सकते हैं, और तारों के उलझने की परेशानियों से भी छुटकारा मिल जाता है.

धूल और पानी को रोकना

स्मार्टफोन्स से 3.5mm हेडफोन जैक हटाने का एक बड़ा फायदा ये हुआ कि फोन अब पानी और धूल से ज्यादा सेफ हो गए हैं. जब यह पोर्ट नहीं होता, तो डिवाइस को अंदर से बेहतर तरीके से सील किया जा सकता है. इससे वाटरप्रूफिंग और डस्ट प्रोटेक्शन और मजबूत हो जाता है.

ऑडियो क्वालिटी में सुधार करना

अक्सर लोग सोचते हैं कि डिजिटल ऑडियो पर स्विच करने से साउंड क्वालिटी अपने आप बेहतर हो जाती है. लेकिन सच थोड़ा अलग है. असल में, ऑडियो का मजा काफी हद तक इस बात पर डिपेंड करता है कि आप कौन-से हेडफोन इस्तेमाल कर रहे हैं. हां ये बात सही है कि एक बड़ा बदलाव ये जरूर होता है कि हेडफोन जैक हटाने से स्मार्टफोन के अंदर ज्यादा एडवांस ऑडियो कंपोनेंट्स लगाने की जगह मिल जाती है. यानी कंपनियां अब बेहतर DAC (Digital-to-Analog Converter) और पावरफुल एम्पलीफायर टेक्नोलॉजी पर काम कर सकती हैं, जिससे साउंड एक्सपीरियंस और बेहतर हो जाता है.

USB-C को यूनिवर्सल पोर्ट बनाना

कई स्मार्टफोन कंपनियां USB-C को एक यूनिवर्सल पोर्ट के तौर पर अपनाने की तरफ तेजी से बढ़ रही हैं. अब यही एक पोर्ट चार्जिंग, डेटा ट्रांसफर और ऑडियो, तीनों काम के लिए इस्तेमाल हो सकता है. दरअसल, USB-C के कई फायदे हैं. इसमें डेटा ट्रांसफर पहले से कहीं ज्यादा फास्ट होता है और पावर डिलीवरी भी बेहतर मिलती है.

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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