कौन खा रहा है आपके फोन-लैपटॉप की स्पीड? ब्लोटवेयर का पूरा खेल समझिए

What Is Bloatware: जानें ब्लोटवेयर कैसे आपकी डिवाइस की स्पीड, बैटरी और सुरक्षा बिगाड़ता है और इसे हटाने के आसान तरीके क्या हैं. पूरी गाइड पढ़ें

What Is Bloatware: आज हर गैजेट हमारी जेब से लेकर वर्कडेस्क तक जगह घेर चुका है, लेकिन इन डिवाइसेज की असली धीमी रफ्तार का कारण अक्सर कुछ ऐसे ऐप होते हैं जिन्हें आपने कभी डाउनलोड ही नहीं किया- यानी ब्लोटवेयर (Bloatware). ये छिपे हुए ऐप्स आपकी डिवाइस की स्पीड, बैटरी और मेमोरी पर चुपचाप हमला करते रहते हैं.

Bloatware: मददगार या सिर्फ बोझ?

अधिकांश स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट मार्केट में आते ही कई ऐसे ऐप्स के साथ बंधे होते हैं जिन्हें ब्रांड, कैरियर या थर्ड-पार्टी डेवलपर्स पहले से डाल देते हैं. कंपनियां इन ऐप्स को इसलिए शामिल करती हैं ताकि उन्हें विज्ञापनों, ट्रायल सॉफ्टवेयर और पार्टनरशिप के जरिए अतिरिक्त कमाई हो सके. कुछ ऐप्स काम के होते हैं, लेकिन ज्यादातर न तो यूजर्स उन्हें खोलते हैं और न ही हटाने की सुविधा दी जाती है. नतीजा- बढ़ती झुंझलाहट और घटती परफॉर्मेंस.

कैसे आपकी डिवाइस की सेहत बिगाड़ता है Bloatware

ये ऐप्स बैकग्राउंड में लगातार संसाधन खींचते रहते हैं- रैम से लेकर स्टोरेज और बैटरी तक. धीरे-धीरे फोन की गति कम होने लगती है, चार्ज जल्दी खत्म होने लगता है और कई बार ऐसे ऐप्स आपके डेटा तक अनचाहा ऐक्सेस भी मांगते हैं. कुछ BLOATware तो विज्ञापनों के जरिए आपकी ऑनलाइन गतिविधि को ट्रैक कर सुरक्षा जोखिम तक पैदा कर देते हैं.

कौन-कौन से ऐप्स चुपके से जगह घेर लेते हैं

अक्सर डिवाइस में डुप्लीकेट ऐप्स मिल जाते हैं- जैसे दो गैलरी ऐप, दो मैसेजिंग ऐप या कंपनी के अपने कस्टम टूल्स. इसके अलावा कैरियर वाले ऐप्स, ट्रायल वर्जन एंटीवायरस, शॉपिंग ऐप्स, गेम्स और कई बार विज्ञापनों वाले ऐप्स बिना पूछे इंस्टॉल रहते हैं. ये सब न केवल इंटरफेस को भर देते हैं बल्कि स्टोरेज को भी बेवजह खा जाते हैं.

कैसे पहचानें और हटाएं Bloatware

सबसे आसान तरीका है- सेटिंग्स में जाकर उन ऐप्स को पहचानना जिन्हें आपने कभी इस्तेमाल नहीं किया. एंड्रॉयड में कई ऐप्स को डिसेबल किया जा सकता है, जबकि थर्ड-पार्टी ऐप पूरी तरह अनइंस्टॉल भी हो जाते हैं. विंडोज में कंट्रोल पैनल और पावरशेल मददगार साबित होते हैं. iPhone और Mac में कुछ ऐप्सहटाये जा सकते हैं, बाकी पर प्रतिबंध लगाकर उन्हें बेअसर किया जा सकता है. चाहें तो Offload Unused Apps जैसी सेटिंग iOS में अपने-आप सफाई करती रहती है.

कैसे रखें अपने गैजेट को BLOATware-फ्री

नये डिवाइस खरीदते समय क्लीन OS वाले मॉडल चुनें, जैसे Pixel फोन या ऐसे लैपटॉप जिनमें कम प्री-इंस्टॉल्ड ऐप आते हैं. समय-समय पर ऐप लिस्ट की जांच करते रहें और जिनका इस्तेमाल बंद हो चुका है, उन्हें हटाते रहें. एडवांस यूजर एंड्रॉयड में ADB या कस्टम ROM का रास्ता भी अपनाते हैं, लेकिन यह जोखिम भरा विकल्प है.

कुल मिलाकर यह कि…

Bloatware आपकी डिवाइस के असली परफॉर्मेंस को अंदर ही अंदर कमजोर कर देता है.थोड़ी जागरूकता और नियमित सफाई से आप अपने फोन, लैपटॉप और टैबलेट को तेज, सुरक्षित और हल्का रख सकते हैं. आखिरकार, जितना साफ सिस्टम, उतनी लंबी डिवाइस की उम्र और उतना बेहतर यूजर एक्सपीरिएंस.

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Author: Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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