अमेरिका-ईरान युद्ध ने बढ़ाई भारत के सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की चिंताएं, हीलियम सप्लाई है वजह

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हीलियम सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. इससे भारत के सेमीकंडक्टर प्लान्स पर भी दबाव दिख रहा है. ऊपर से सिरेमिक कमी ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार धीमी पड़ सकती है.

भारत का सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर इस समय एक नए खतरे का सामना कर रहा है. वजह है 19 मार्च को ईरान द्वारा कतर के Ras Laffan LNG हब पर किए गए कथित हमले की खबर. इस घटना ने हीलियम (Helium) की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है. हीलियम LNG से निकलने वाला एक जरूरी बायप्रोडक्ट है और सेमीकंडक्टर बनाने में बेहद जरूरी होता है. ऐसे समय में जब भारत खुद को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक और चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, यह खबर थोड़ी चिंता जरूर बढ़ाती है.

हीलियम का महत्व

हीलियम सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए किसी रीढ़ की हड्डी से कम नहीं है. इसका इस्तेमाल मशीनों को ठंडा रखने, चिप्स की टेस्टिंग करने और उन्हें बहुत सटीक तरीके से बनाने में किया जाता है. इसका कोई आसान ऑप्शन भी नहीं है. फिलहाल प्रोडक्शन पर सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन इंडस्ट्री के बड़े खिलाड़ी इसे एक गंभीर चेतावनी के रूप में देख रहे हैं. यही वजह है कि कंपनियां अब पहले से ही प्लानिंग में लग गई हैं ताकि आने वाले समय में सप्लाई चैन पर कोई बड़ा असर न पड़े.

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर असर

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका असर अब साफ दिखने लगा है. खासकर शॉर्ट-टर्म में सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, टेस्टिंग फैसिलिटीज और दूसरे प्रिसिजन वाले कामों में रुकावटें आ सकती हैं. हालांकि भारत में PCB असेंबली में हीलियम का इस्तेमाल ज्यादा नहीं होता (क्योंकि यह महंगा है), फिर भी इसका इंडायरेक्ट असर अब महसूस किया जा रहा है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट्स की टाइमलाइन खिंच रही हैं, नई मशीनों की इंस्टॉलेशन में देरी हो रही है और प्रोक्योरमेंट प्रोसेस (सामान खरीदने की पूरी प्लानिंग) भी स्लो पड़ गया है.

सिरेमिक सप्लाई में भी रुकावट 

इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री इस समय एक नई परेशानी से जूझ रही है. दरअसल, खास तरह के सिरेमिक मटेरियल की कमी होने लगी है. वजह है मोरबी में 550 से ज्यादा सिरेमिक यूनिट्स का बंद होना. इसका सीधा असर उन छोटे लेकिन बेहद जरूरी पार्ट्स पर पड़ा है, जैसे मल्टीलेयर सिरेमिक कैपेसिटर. यही वो कंपोनेंट्स हैं जो स्मार्टफोन, लैपटॉप और यहां तक कि ऑटोमोबाइल इलेक्ट्रॉनिक्स में भी इस्तेमाल होते हैं.

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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