कवर लगे फोन को चार्ज करना सही है या बैटरी के लिए खतरनाक? आज जान लें हर एक जरूरी बात

Smartphone Charging Tips: आपने नोटिस किया होगा कि जब आपका फोन चार्जिंग पर लगा होता है और जब आप उसे उठाते हैं तो फोन उम्मीद से थोड़ा ज्यादा गर्म लगता है. फोन के साथ कवर भी गरम महसूस होता है. ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि फोन चार्ज करते वक्त कवर रखना चाहिए या उसे हटा देना बेहतर होता है. आइए जानते हैं.

Smartphone Charging Tips: आपने जरूर नोटिस किया होगा कि आपका फोन चार्जिंग पर लगा होता है और जब आप उसे उठाते हैं तो फोन उम्मीद से थोड़ा ज्यादा गर्म लगता है. इतना भी नहीं कि घबराहट हो जाए, बस इतना कि ध्यान चला जाए. फोन का कवर भी गरम महसूस होता है. तभी दिमाग में एक सवाल आता है कि क्या चार्जिंग के दौरान कवर लगाए रखना सही है या कहीं ये फोन को नुकसान तो नहीं पहुंचा रहा?

ये बात मन में अटकी रहती है, क्योंकि बैटरी फोन का वो हिस्सा है जो धीरे-धीरे खराब होती है और हमें तब पता चलता है, जब नुकसान हो चुका होता है. ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि फोन चार्ज करते वक्त कवर रखना चाहिए या उसे हटा देना बेहतर होता है. आइए जानते हैं.

चार्जिंग के दौरान आपका फोन क्या कर रहा होता है?

फोन चार्ज होते वक्त थोड़ा गर्म होता है ये बिल्कुल नॉर्मल बात है. चार्जिंग के दौरान बैटरी में ऊर्जा जाती है और उस प्रोसेस में गर्मी पैदा होती ही है. आज के स्मार्टफोन इसी सच्चाई को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं. जैसे ही टेम्परेचर बढ़ता है, फोन खुद चार्जिंग की स्पीड कम कर देता है और अगर गर्मी ज्यादा हो जाए तो चार्जिंग को रोक भी देता है. ये कोई खराबी नहीं है, बल्कि सेफ्टी के लिए किया गया इंतजाम है.

फोन पर कवर लगाकर चार्ज करने से क्या होता है?

आपको बता दें कि पतला कवर चार्जिंग के समय ज्यादा फर्क नहीं डालता. सिलिकॉन हो, TPU हो या लेदर ऐसे कवर थोड़ी-सी गर्मी रोक लेते हैं, लेकिन रोजमर्रा की चार्जिंग में संतुलन बिगाड़ने जितना नहीं. अगर आप रात में नॉर्मल चार्जर से फोन लगाकर छोड़ देते हैं और उसे छेड़ते नहीं हैं, तो सिस्टम खुद ही धीमी और स्थिर चार्जिंग पर आ जाता है. करोड़ों लोग रोज ऐसा ही करते हैं और उन्हें कोई समस्या नहीं होती.

मामला तब बदलता है जब फोन पर मोटा कवर लगा हो. रग्ड कवर, वॉलेट टाइप कवर या ऐसे केस जो सीढ़ियों से गिरने पर भी फोन को बचा लें. ये अपने काम में काफी अच्छे होते हैं. लेकिन एक बात ये भी करते हैं, वो है गर्मी को अंदर ही रोक लेना. ऐसे केस के साथ जब आप फोन को फास्ट चार्ज करते हैं, तो गर्मी जल्दी जमा होती है और देर तक बनी रहती है.

तो क्या हर बार चार्ज करते समय केस उतार देना चाहिए? 

इसका जवाब है नहीं. न ये जरूरी है और न ही इतना प्रैक्टिकल. लेकिन कुछ मौकों पर ऐसा करना फायदेमंद होता है. जैसे दिन में फास्ट चार्जिंग करते समय, चार्ज पर लगे हुए नेविगेशन चलाते वक्त, या चार्जिंग के दौरान गेम खेलते हुए. ऐसे समय पर गर्मी बहुत जल्दी बढ़ती है. तब मोटा कवर हटा देने से फोन को सांस लेने की जगह मिल जाती है. केस लगाकर चार्ज करना गलत नहीं है, लेकिन ये भूल जाना कि गर्मी को बाहर निकलने की जगह चाहिए, वही असली गलती है.

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Published by: Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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