RBI Rules on Loan EMI Default: क्या लोन की ईएमआई (EMI) न चुकाने पर बैंक सचमुच आपका मोबाइल नंबर ब्लॉक या बंद कर सकता है? सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म और व्हाट्सऐप पर इन दिनों एक ऐसा ही चौंकाने वाला मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है. इस भ्रामक खबर को पढ़कर आम जनता और कर्जधारकों के बीच डर और असमंजस का माहौल बन गया है. आज के डिजिटल युग में मोबाइल नंबर बैंक खातों और दैनिक जीवन से जुड़ा सबसे जरूरी साधन है, ऐसे में इस तरह के दावे हर किसी को परेशान कर रहे हैं. आइए जानते हैं कि इस वायरल दावे के पीछे की असली हकीकत क्या है और देश का केंद्रीय बैंक, यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस विषय में क्या नियम तय करता है.
वायरल दावे की हकीकत: क्या बैंकों के पास है ऐसा कोई अधिकार?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह दावा पूरी तरह से निराधार और फर्जी है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का ऐसा कोई भी नियम और कानून अस्तित्व में नहीं है, जो किसी बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) को कर्ज न चुकाने की स्थिति में किसी ग्राहक का मोबाइल नंबर बंद करने की शक्ति देता हो. दरअसल, देश में मोबाइल सेवाएं पूरी तरह से टेलीकॉम रेगुलेटरी नियमों के तहत संचालित होती हैं. टेलीकॉम कंपनियों के कामकाज में बैंकों का कोई हस्तक्षेप नहीं होता, इसलिए कोई भी वित्तीय संस्थान किसी कस्टमर का सिम कार्ड ब्लॉक करने का आदेश नहीं दे सकता.
कर्ज वसूली को लेकर केंद्रीय बैंक के सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देश
आरबीआई ने लोन रिकवरी (कर्ज वसूली) की प्रक्रिया को लेकर बेहद कड़े और मानवीय नियम बनाए हैं. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, वसूली की पूरी प्रक्रिया हमेशा कानूनी, निष्पक्ष और गरिमापूर्ण होनी चाहिए. यदि कोई बैंक रिकवरी के लिए किसी बाहरी एजेंट को नियुक्त करता है, तो उसके द्वारा किये गए व्यवहार की पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ बैंक की होती है. ग्राहकों को डराना, मानसिक रूप से प्रताड़ित करना या मोबाइल नंबर ब्लॉक करने जैसी झूठी अफवाहें फैलाकर दबाव बनाना सीधे तौर पर आरबीआई की 'फेयर प्रैक्टिस गाईडलाईन्स' का खुला उल्लंघन माना जाता है.
लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में क्या कार्रवाई कर सकती हैं वित्तीय संस्थाएं?
भले ही बैंक आपका मोबाइल नंबर बंद नहीं कर सकते, लेकिन ईएमआई बाउंस होने पर वे नियमानुसार सख्त वित्तीय और कानूनी कदम जरूर उठा सकते हैं. निर्धारित समय पर भुगतान न करने की वजह से बैंक आपसे दंडात्मक शुल्क (पेनल्टी) और अतिरिक्त ब्याज वसूल कर सकता है. इसके अलावा, लोन डिफॉल्ट की यह जानकारी तुरंत क्रेडिट ब्यूरो को भेजी जाती है, जिससे आपका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) बुरी तरह प्रभावित होता है और भविष्य में नया लोन मिलना मुश्किल हो जाता है. बैंक अपनी बकाया राशि की वसूली के लिए कानूनी नोटिस जारी कर अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं, पर सिम कार्ड ब्लॉक करना इस कानूनी दायरे से पूरी तरह बाहर है.
सिम बंद होने की धमकी मिलने पर तुरंत करें ये जरूरी काम
यदि कोई रिकवरी एजेंट या वित्तीय संस्थान आपको लोन डिफॉल्ट के बदले मोबाइल नंबर बंद करने की धमकी देता है, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. सबसे पहले आप संबंधित बैंक से इस संबंध में एक लिखित स्पष्टीकरण की मांग करें. इसके बाद तुरंत बैंक के ऑफिशियल कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करके अपनी शिकायत दर्ज करवाएं. ऐसे मानसिक दबाव बनाने वाले संदेशों के स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्डिंग्स को हमेशा एक पुख्ता सबूत के तौर पर सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर आप बैंकिंग लोकपाल या पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकें.
संकट के समय बैंक से सीधा संवाद है सबसे सुरक्षित विकल्प
यदि किसी जायज या अपरिहार्य कारणवश आप समय पर लोन की ईएमआई भरने में असमर्थ हैं, तो बैंक से छिपने के बजाय उनसे तुरंत संपर्क साधना सबसे सही तरीका है. ज्यादातर बैंक वास्तविक समस्याओं को समझते हैं और ग्राहकों को रीपेमेंट प्लान में ढील या ईएमआई रिस्ट्रक्चरिंग (लोन पुनर्गठन) जैसे राहत भरे विकल्प प्रदान करते हैं. बैंक केवल आरबीआई के नियमों की चौखट के भीतर रहकर ही काम कर सकते हैं, इसलिए किसी भी झूठी अफवाह पर विश्वास न करें.
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