FAStag New Rule: फास्टैग यूजर्स को नहीं देना पड़ेगा दुगना पेनल्टी, NHAI ने दूर किया कन्फ्यूजन

NHAI ने FASTag नियमों में बदलाव से लेन-देन अस्वीकृत होने की आशंकाओं को खारिज कर दिया है. हाल ही में जारी NPCI सर्कुलर का उद्देश्य बैंकों के बीच विवाद समाधान प्रणाली को मजबूत करना है, जिससे FASTag यूजर्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

FAStag New Rule: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने 17 फरवरी से फास्टैग ट्रांजैक्शन के संबंध में नए नियम लागू किए हैं, जिनमें यह कहा गया गया था कि यदि कोई टैग ब्लैकलिस्टेड है, बैलेंस कम है, या टोल प्लाजा पर पहुंचने से 60 मिनट पहले हॉटलिस्ट किया गया था और आगमन के 10 मिनट बाद भी वही स्थिति बनी रहती है, तो लेन-देन त्रुटि कोड 176 के साथ अमान्य कर दिया जाएगा. फिलहाल नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने स्पष्ट किया कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी हालिया सर्कुलर का FASTag ग्राहकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. NHAI ने स्पष्ट किया है कि FASTag यूजर्स पर कोई अतिरिक्त प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और यह सिस्टम पहले की तरह सामान्य रूप से काम करता रहेगा.

NHAI ने दूर किया कन्फ्यूजन 

NHAI ने बताया कि NPCI सर्कुलर का उद्देश्य केवल अधिग्रहणकर्ता बैंकों (Acquirer Banks) और जारीकर्ता बैंकों (Issuer Banks) को FASTag की स्थिति को लेकर होने वाले विवादों को हल करने में सहायता करना है. यह निर्देश यह सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है कि लेनदेन एक उचित समय-सीमा में हो, जिससे हाईवे पर जाने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. नेशनल हाईवे के सभी टोल प्लाजा अब ICD 2.5 प्रोटोकॉल का उपयोग कर रहे हैं, जिससे FASTag यूजर्स को रियल-टाइम टैग स्टेटस अपडेट मिलते हैं. NHAI ने जानकारी दी कि यह सिस्टम यात्रियों को टोल प्लाजा पार करने से पहले कभी भी अपने FASTag को रिचार्ज करने की सुविधा देता है, जिससे सफर सुगम बनता है.

NHAI ने FAStag यूजर्स को दिया सुझाव 

हालांकि, कुछ स्टेट हाईवे टोल प्लाजा अभी भी पुराने ICD 2.4 प्रोटोकॉल पर काम कर रहे हैं, जिसमें टैग स्टेटस का अपडेट समय-समय पर किया जाता है. मौजूदा समय में कई स्टेट हाईवे टोल प्लाजाओं को ICD 2.5 प्रोटोकॉल में अपग्रेड किया जा रहा है, जिससे टोल कलेक्शन सिस्टम को अधिक प्रभावी और यात्रियों के अनुकूल बनाया जा सके.

NHAI ने FASTag ग्राहकों को सलाह दी है कि वे अपने वॉलेट को UPI या बैंक खाते से लिंक करें और ऑटो-रिचार्ज सेटिंग्स को एक्टिवटे रखें. जो यूजर्स मैन्युअल रूप से रिचार्ज करना पसंद करते हैं, वे टोल प्लाजा पहुंचने से पहले UPI, नेट बैंकिंग या अन्य भुगतान विकल्पों के जरिए अपने FASTag को रिचार्ज कर सकते हैं

यह भी पढ़े: Google Pay के बाद क्या PhonePe और Paytm भी लगाएंगे UPI Charge?

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >