12 साल में 10 गुना बढ़ा भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, आनंद महिंद्रा ने बताई इसके पीछे की कहानी

आनंद महिंद्रा ने कहा कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत चमकदार हेडलाइन्स से नहीं, बल्कि हजारों MSMEs से बन रही है. एक्स पर एक यूजर ने पोस्ट किया कि इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन $10 बिलियन से $115 बिलियन तक पहुंच गया है.

भारत की मैन्युफैक्चरिंग ताकत चमकदार हेडलाइन्स से नहीं, बल्कि वर्कशॉप्स, फैक्ट्री फ्लोर्स और मध्यम स्तर के उद्योगों से बन रही है. आनंद महिंद्रा ने एक एक्स यूजर शुभम मिश्रा की पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश की औद्योगिक क्रांति चुपचाप आगे बढ़ रही है और हजारों MSMEs विश्वस्तरीय निर्माता बनते जा रहे हैं.

महिंद्रा का संदेश: MSMEs ही असली ताकत

महिंद्रा ने स्पष्ट किया कि भारत का भविष्य केवल बड़ी कंपनियों पर निर्भर नहीं होगा. असली औद्योगिक शक्ति उन हजारों मध्यम स्तर के उद्यमों से बनेगी जो धीरे-धीरे ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं. उन्होंने कहा- मैन्युफैक्चरिंग की असली ताकत कभी ग्लैमरस नहीं होती, यह फैक्ट्री शेड्स और वर्कशॉप्स में चुपचाप बढ़ती है.

बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान नियमों की जरूरत

महिंद्रा ने MSMEs को मजबूत बनाने के लिए बेहतर सड़कें, प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क्स, तेज रेग्युलेटरी अप्रूवल्स और कम ऑपरेशनल फ्रिक्शन की मांग की. उनके अनुसार, मध्यम स्तर के उद्योगों के लिए Ease of Doing Business उतना ही महत्वपूर्ण है जितना बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए दिए जाने वाले इंसेंटिव्स.

शुभम मिश्रा का दावा: प्रगति को कम आंका जा रहा है

मिश्रा ने कहा कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ को अक्सर कम आंका जाता है क्योंकि असली काम सप्लायर इकोसिस्टम और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में हो रहा है. उन्होंने बताया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014 में $10 बिलियन से बढ़कर आज $115 बिलियन हो गया है. Apple की सप्लाई चेन में भारत की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है- पांच साल में iPhone उत्पादन 14% तक पहुंच गया है.

चीन से तुलना

मिश्रा ने भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना चीन के शुरुआती औद्योगिक दौर से की. उन्होंने कहा कि चीन 2003 से 2018 के बीच धीरे-धीरे असेंबलिंग से विश्वस्तरीय मैन्युफैक्चरिंग ताकत बना. भारत भी आज उसी रास्ते पर है, जहां Tier-3 शॉप्स और छोटे वेंडर्स असली औद्योगिक क्रांति का हिस्सा बन रहे हैं.

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