सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो असली है या Deepfake कैसे पता करें? जानें खुद को सेफ रखने के तरीके

Deepfake: डीपफेक एक ऐसा वीडियो, फोटो या ऑडियो होता है जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया जाता है, ताकि किसी व्यक्ति को ऐसा दिखाया या सुनाया जा सके जैसे उसने कुछ कहा या किया हो, जबकि उसने असल में ऐसा नहीं किया होता. कई ऐसे संकेत होते हैं जिनसे पता चल सकता है कि कोई वीडियो डीपफेक है या नहीं. आइए आपको बताते हैं.

Deepfake: सोशल मीडिया पर हाल ही में एक वीडियो बड़ा तेजी से वायरल हुआ. उस वीडियो को मशहूर गेमिंग क्रिएटर पायल धरे उर्फ पायल गेमिंग से जोड़कर देखा जाने लगा और देखते ही देखते ऑनलाइन विवाद खड़ा हो गया. नौबत यह हुई की बुधवार को उस वायरल वीडियो को लेकर पायल धरे ने एक लंबा बयान जारी किया. पायल ने साफ कहा कि वीडियो में दिख रही लड़की वह नहीं हैं और उस क्लिप का उनके जीवन, पहचान या फैसलों से कोई लेना-देना नहीं है.

इस घटना ने एक बार फिर डीपफेक कंटेंट की बढ़ती समस्या पर ध्यान खींचा है और लोगों के बीच यह चर्चा शुरू कर दी है कि डीपफेक क्या होते हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है. आइए आपको इसके बारे में बताते हैं.

क्या है डीपफेक? (What is Deepfake)

डीपफेक ऐसा वीडियो, फोटो या ऑडियो होता है जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाया जाता है, ताकि किसी व्यक्ति को ऐसा दिखाया या सुनाया जा सके जैसे उसने कुछ कहा या किया हो, जबकि उसने असल में ऐसा नहीं किया होता. इसमें असली फुटेज के साथ AI से बनाए गए चेहरे के हाव-भाव और आवाज को जोड़ा जाता है. ये कंटेंट इतना असली लगता है कि पहली नजर में पहचान पाना मुश्किल हो जाता है. आजकल ऐसे डीपफेक कंटेंट का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, किसी की छवि खराब करने और लोगों को ऑनलाइन गुमराह करने के लिए तेजी से किया जा रहा है.

डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे करें?

कई ऐसे संकेत होते हैं जिनसे पता चल सकता है कि कोई वीडियो डीपफेक है. जैसे चेहरे की हरकतें अजीब लगना, चेहरे के किनारों का धुंधला दिखना या होंठों की आवाज और मूवमेंट का मेल न खाना. कई बार चेहरे की रोशनी बैकग्राउंड से अलग दिखती है या एक्सप्रेशन बार-बार एक जैसे लगते हैं.

इसके अलावा वीडियो के सोर्स पर भी ध्यान देना जरूरी है. अगर वीडियो किसी अनजान अकाउंट, संदिग्ध लिंक या ऐसे प्लेटफॉर्म से आया है जो फेक कंटेंट के लिए जाने जाते हैं, तो तुरंत अलर्ट हो जाना चाहिए.

खुद को कैसे रखें सेफ?

डीपफेक से बचने के लिए लोगों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए, खासकर जब वे सनसनीखेज दावों के साथ शेयर किए गए हों. किसी भी जानकारी पर भरोसा करने या उसे आगे फैलाने से पहले भरोसेमंद न्यूज सोर्स से उसकी पुष्टि जरूर करें.

सोशल मीडिया की प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत रखें और अपनी निजी फोटो या वीडियो सोच-समझकर ही शेयर करें. अगर आपको सोशल मीडिया पर फर्जी या भ्रामक कंटेंट दिखे तो उसे तुरंत रिपोर्ट करें, ताकि उसकी जांच होकर हटाया जा सके.

यह भी पढ़ें: क्या होगा जब कभी सचेत हुआ AI? कैम्ब्रिज के फिलॉसफर का दावा- हमें पता भी नहीं चलेगा

फेक ग्राफ़िक्स से सावधान रहें

फेक ग्राफ़िक्स से सावधान रहें

Fact check: फैलाई जा रही है मोहन भागवत की प्रभात खबर के Logo वाली भ्रामक तस्वीर

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Ankit anand

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, गैजेट्स और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को लगातार कवर करते हैं.

अंकित की मजबूत पकड़ स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट और ऐप्स, AI टूल्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक से जुड़े विषयों में है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री अपडेट्स पर रिसर्च-बेस्ड कंटेंट लिखते हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर को केवल लॉन्च या स्पेसिफिकेशन तक सीमित न रखकर, यूजर एक्सपीरियंस, टेक्नोलॉजी और बाजार के ट्रेंड्स के नजरिए से भी समझाया जाए.

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब 1 वर्ष तक काम किया. वहां उन्हें टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज इकोसिस्टम में सटीक, स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाने की समझ विकसित करने में मदद की.

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >