डिजिटल इंडिया के दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट ने जिंदगी को आसान जरूर बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ा है. हर दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें लोग फर्जी कॉल, नकली लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापनों और ऑनलाइन ऑफर्स के झांसे में आकर अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई गंवा देते हैं. खास बात यह है कि साइबर अपराधी अब पहले से ज्यादा चालाक हो चुके हैं और नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करके लोगों को निशाना बना रहे हैं. ऐसे में खुद को सुरक्षित रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.
देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराध के मामले
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. अपराधी कभी बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं, तो कभी पुलिस या सरकारी एजेंसी का नाम लेकर लोगों को डराने की कोशिश करते हैं. कई बार सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन या भारी छूट वाले ऑफर दिखाकर भी लोगों को फंसाया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में थोड़ी सावधानी बरतकर ऐसे अपराधों से बचा जा सकता है.
ओटीपी और पासवर्ड किसी से साझा न करें
साइबर सुरक्षा का सबसे पहला नियम है कि अपने ओटीपी, पासवर्ड, यूपीआई पिन और बैंकिंग डिटेल्स किसी भी व्यक्ति के साथ साझा न करें. बैंक, आरबीआई या कोई सरकारी एजेंसी कभी भी फोन करके ऐसी जानकारी नहीं मांगती. यदि कोई ऐसा करता है तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए.
फर्जी कॉल और लिंक से रहें सतर्क
साइबर अपराधी अक्सर फोन कॉल, एसएमएस या मैसेजिंग ऐप के जरिए लोगों तक पहुंचते हैं. अगर कोई व्यक्ति खुद को बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी बताकर जानकारी मांग रहा है, तो पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें. इसी तरह किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें क्योंकि एक गलत क्लिक आपके बैंक खाते और निजी जानकारी को खतरे में डाल सकता है.
सोशल मीडिया ऑफर्स और विज्ञापनों की जांच जरूरी
सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर दिखने वाले हर विज्ञापन पर भरोसा करना सही नहीं है. कई फर्जी वेबसाइट और नकली ऑफर्स लोगों को आकर्षित करने के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं. किसी भी ऑफर का लाभ लेने से पहले उसकी सत्यता की जांच जरूर करें. बेहद सस्ते दाम या असामान्य छूट वाले ऑफर्स अक्सर धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकते हैं.
वीडियो कॉल और डिजिटल अरेस्ट जैसे जाल से बचें
हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट और फर्जी वीडियो कॉल से जुड़ी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं. साइबर अपराधी वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराकर पैसे ऐंठने की कोशिश करते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अनजान नंबरों से आने वाली वीडियो कॉल को स्वीकार करने से बचें और किसी भी दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करें.
ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें शिकायत
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है, तो समय गंवाए बिना इसकी शिकायत करनी चाहिए. राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है. इसके अलावा साइबर क्राइम पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है. जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधी भी उतनी ही तेजी से नए तरीके खोज रहे हैं. ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है. यदि लोग इन सात संकल्पों को अपनी डिजिटल जिंदगी का हिस्सा बना लें, तो साइबर ठगी के अधिकांश मामलों से बचा जा सकता है.
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