Chandrayaan 3 की लैंडिंग के मौके पर जानिए धरती 'मां' से कितने अलग हैं अपने चंदा 'मामा'?

moon days and nights compared to earth - चंद्रमा का एक दिन धरती के लगभग 28 दिनों के बराबर होता है. पृथ्वी के 14 दिन तक चंद्रमा पर दिन रहता है और बाद के 14 दिन तक रात होती है. आइए जानते हैं धरती और उसके उपग्रह चंद्रमा के बीच रात और दिन के फर्क को.

Chandrayaan 3 Landing Update : चंद्रयान-3 लगातार चांद की ओर बढ़ रहा है. बताया जा रहा है कि चंद्रयान-3 के साथ गये रोवर और लैंडर चांद पर पूरा एक दिन बिताएंगे. अगर आप सोच रहे हैं कि जैसे धरती पर एक दिन 24 घंटे का होता है, उतना ही लंबा दिन चंद्रमा पर भी होता होगा, तो आप गलत हैं. आइए जानते हैं धरती और उसके उपग्रह चंद्रमा के बीच रात और दिन के फर्क को.

सवाल यह है कि चंद्रमा का एक दिन धरती के कितने दिन के बराबर होता है? दरअसल, चंद्रमा का एक दिन धरती के एक दिन के बराबर नहीं होता है. बल्कि चंद्रमा का एक दिन धरती के लगभग 28 दिनों के बराबर होता है. पृथ्वी के 14 दिन तक चंद्रमा पर दिन रहता है और बाद के 14 दिन तक रात होती है. हालांकि धरती पर 12 घंटे का ही दिन होता है और 12 घंटे की ही रात होती है.

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चंद्रमा धरती की परिक्रमा लगभग 27.3 दिन में पूरी करता है. इसी कारण से चंद्रमा का एक दिन धरती के 27.3 दिनों के बराबर माना जाता है. दरअसल, चंद्रमा धीमी गति से परिक्रमा करता है और इसलिए इसे धरती की परिक्रमा करने मे लगभग 28 दिन लग जाते हैं. जबकि धरती को सूरज की परिक्रमा करने मे केवल 24 घंटे लगते हैं.

चंद्रमा पर रात के समय तापमान -200 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को ज्यादा ठंडा बताया जाता है. चंद्रमा पर दक्षिणी ध्रुव में कई ऐसे क्रेटर हैं, जहां कभी सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती है. हालांकि दिन के समय में इसका तापमान 127 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है.

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धरती और चंद्रमा के बीच दिन और रात में सबसे बड़ा अंतर यह है कि चंद्रमा का एक ही चेहरा हमेशा धरती की ओर होता है. इसका कारण यह है कि चांद का घूर्णन अवधि उसी समय के बराबर है, जिसके लिए वह धरती की परिक्रमा करता है. इसलिए, हम कभी भी चंद्रमा के दूसरे चेहरे को नहीं देख सकते.

जब चंद्रमा धरती के सामने होता है, तो हम उसका चमकीला चेहरा देखते हैं. जब चंद्रमा धरती से दूर होता है, तो हम उसका अंधेरा चेहरा देखते हैं. चंद्रमा के चमकने का कारण यह है कि सूर्य का प्रकाश उसके पृष्ठ पर पड़ता है और परावर्तित होता है.

चंद्रमा का दिन और रात धरती के दिन और रात से बहुत लंबा होता है. चांद का एक दिन लगभग 27.3 दिन का होता है, जबकि धरती का एक दिन लगभग 24 घंटे का होता है. इसका कारण यह है कि चांद का घूर्णन अवधि उसकी परिक्रमा अवधि से बराबर है.

चंद्रमा पर कोई वायुमंडल नहीं है, इसलिए दिन और रात के बीच तापमान में बहुत बड़ा अंतर होता है. चंद्रमा के दिन के समय तापमान 127 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि चंद्रमा के रात के समय तापमान -200 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है.

चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव की प्रकृति में बहुत अंतर माना जाता है. लिहाजा दोनों की रात, तापमान में भी अंतर बताया गया है. चांद का एक हिस्सा ऐसा भी है, जो कभी पृथ्वी का सामना नहीं करता, यहां आमतौर पर कम रोशनी होती है.

परिक्रमा के दौरान चंद्रमा अपनी धुरी पर केवल 1.54 डिग्री तक तिरछा होता है, जबकि पृथ्वी 23.44 डिग्री तक. यह स्थिति दो बातों को जन्म देती है. एक यह कि चांद पर पृथ्वी की तरह मौसम नहीं बदलते और दूसरी बात ये कि चांद के ध्रुवों पर ऐसे कई इलाके हैं जहां कभी सूरज की रोशनी या किरणें पहुंच ही नहीं पातीं.

रात में चंद्रमा का तापमान लगातार गिरता है. दिन में तापमान लगातार बढ़ता है. फिर चंद्रमा के अलग-अलग हिस्सों की स्थितियां भी अलग हैं. माना जाता है कि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव ज्यादा ठंडा होता है. रातें तो इतनी ठंडी होती हैं कि पृथ्वी का कोई भी मनुष्य शायद ही वहां उन हालात में रह पाये.

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लेखक के बारे में

Author: Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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