700 सरकारी सेवाएं WhatsApp पर आयीं, डिजिटल गवर्नेंस में चंद्रबाबू नायडू ने कर दिया कमाल

Mana Mitra: चंद्रबाबू नायडू की सरकार ने 15 अगस्त से ‘मना मित्र’ व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म के जरिए 700 सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराने का ऐलान किया है. अधिकारियों को निर्देश दिया है कि व्हाट्सऐप आधारित सेवाओं को सुचारू रूप से लागू किया जाए और जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए अभियान शुरू किए जाए.

Mana Mitra: डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने एक खास पहल की है. 15 अगस्त से ‘मना मित्र’ व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म के जरिए 700 सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य नागरिकों को सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाना और कार्यालयों के चक्कर लगाए बिना ज्यादा से ज्यादा काम निपटाने की सुविधा देना है. यह राज्य की ई-गवर्नेंस पहल में एक बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है.

सोमवार को रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी (RTGS) की समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि WhatsApp बेस्ड सर्विसों का संचालन बिना किसी टेक्नोलॉजी फॉल्ट के सुचारू रूप से किया जाए. साथ ही, अधिक से अधिक लोगों को इन सेवाओं से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान शुरू करने के भी आदेश दिया गया है.

क्या है Mana Mitra?

मना मित्रा आंध्र प्रदेश का WhatsApp बेस्ड गवर्नेंस प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए नागरिक सीधे व्हाट्सऐप पर ही विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं. इस सर्विस को जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था. इस प्लेटफार्म पर शिक्षा, राजस्व, परिवहन समेत कई सेवाएं नागरिकों को दी जाती है, इस सर्विस को शुरू करने का उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक सुलभ और सुविधाजनक बनाना है.

शुरू हुआ Aware 2.0

मना मित्रा के अलावा मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अवेयर 2.0 का उद्घाटन किया. यह एक एडवांस्ड RTGS मॉड्यूल है, जो बारिश का पूर्वानुमान लगाने के साथ-साथ रियल-टाइम जल संबंधी डेटा का विश्लेषण करने में माहिर है. इसमें नदियों में पानी के बहाव, भूजल अवशोषण और वर्षा जल के इस्तेमाल की रणनीतियों से जुड़ी जानकारी शामिल है.

मुख्यमंत्री ने कई मोर्चों पर निर्देश जारी किए, जिनमें रोग नियंत्रण, ड्रोन के जरिए निगरानी और AI आधारित कानून-व्यवस्था पर जोर दिया गया. उन्होंने विशेष रूप से मलेरिया जैसे संक्रामक बिमारियों की रोकथाम के लिए कदम उठाने को कहा और ड्रोन का इस्तेमाल कर संदूषण वाले इलाकों की पहचान व आपराधिक तत्वों पर निगरानी रखने के भी निर्देश दिए.

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By Ankit anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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