मिलनमोड़ से लालचंद घाट की ओर जानेवाली सड़कें जर्जर

सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी से सटे चंपासारी ग्राम पंचायत क्षेत्र के मिलनमोड़, कोराइबाड़ी, लालचंद घाट इलाके के ग्रामवासी इन दिनों सड़कों की धूल से काफी परेशान हैं. ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं. ग्रामीणों में सांस संबंधी शिकायतें अधिक देखी जा रही हैं. खासकर बच्चे, वृद्ध व शारीरिक रूप से कमजोर लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं. ग्रामीणों […]

सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी से सटे चंपासारी ग्राम पंचायत क्षेत्र के मिलनमोड़, कोराइबाड़ी, लालचंद घाट इलाके के ग्रामवासी इन दिनों सड़कों की धूल से काफी परेशान हैं. ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं. ग्रामीणों में सांस संबंधी शिकायतें अधिक देखी जा रही हैं. खासकर बच्चे, वृद्ध व शारीरिक रूप से कमजोर लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि मिलनमोड़ से लालचंद घाट की ओर जानेवाली सड़कें काफी जर्जर हो गयी है. सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे हो गये हैं. इस बदहाल सड़क पर जब वाहन गुजरते हैं तो धूल का गुबार उठता है.
वैसे भी यह मौसम गरम हवा चलने का है. गरम हवा चलने से भी इस इलाके में हमेशा धूल उड़ती रहती है. धूल व सड़क से परेशान ग्रामीण इन दिनों पानी के संकट से भी जूझ रहे हैं. स्थानीय ग्रामीण नेता-मंत्री, ग्राम पंचायत व महकमा प्रशासन पर काफी आक्रोशित दिखे. ग्रामीणों का कहना है कि नेता-मंत्री केवल वोट की राजनीति करते हैं. साधारण लोगों की समस्याओं से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है. चुनाव नजदीक आते ही नेता-मंत्री इलाके में बार-बार दिखायी देते हैं. लोगों से हाथ जोड़कर, पांव पकड़कर वोट की भीख मांगते हैं और सभी समस्याओं को जल्द दूर करने का बड़ा-बड़ा वादा करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि नेता-मंत्रियों का काम बन जाने पर वापस उनका चेहरा पांच वर्ष बाद ही चुनाव के समय दिखायी देता है.

आक्रोशित ग्रामीणों ने इलाके कि समस्याओं के लिए स्थानीय ग्राम पंचायत व सिलीगुड़ी महकमा प्रशासन को भी जिम्मेदार ठहराया. ग्रामीणों का कहना है कि समस्याओं से स्थानीय पंचायत सदस्य, प्रधान व सिलीगुड़ी महकमा परिषद के अधिकारियों व सभाधिपति को भी अवगत कराया गया, लकिन समस्याएं जस की तस बनी हुई है. कोराइबाड़ी की रहनवाली एक गृहवधू लक्ष्मी दास का कहना है कि स्थानीय लालचंद घाट से बालू-बजरी ढोनेवाले बड़े-बड़े वाहन इसी सड़क से मिलनमोड़ होते हुए सिलीगुड़ी की ओर जाते हैं. दिन-रात इस सड़क से इन वाहनों का आवागमन होता है. वहीं, लाल चंद घाट के पास स्थित संत जोंस स्कूल और लिटिल एंजेल स्कूल की भी आठ-नौ बसें दिनभर फेरा लगाती रहती हैं. इससे सड़कों पर हमेशा धूल उड़ती रहती है.

धूल के कारण हम ग्रामीणों में सांस व कफ की बीमारी अधिक हो रही है. अन्य एक महिला मेरी मुर्मु ने कहा कि धूल के कारण हमलोगों का जीना मुहाल हो गया है. सही तरीके न खाना खा सकते हैं और न ही साफ-सुथरे कपड़े पहन सकते हैं. बरतन, कपड़े, बिस्तर व घरों में हमेशा धूल जमी रहती है. हमारे रिश्तेदार भी एकबार आने के बाद दोबारा नहीं आना चाहते. मेरी का आरोप है कि लालचंद घाट से दिन-रात बालू-बजरी का खनन होने से इलाके में पानी का संकट भी काफी गहरा गया है. नदी का जलस्तर काफी नीचे चला जाने से इलाके के अधिकांश कुंए अभी से ही सूखने लगे हैं. कई कुएं तो पूरी तरह सूख चुके हैं.

एक ग्रामीण युवक एलाकी मुर्मु ने बताया कि ग्राम पंचायत सदस्य व प्रधान को कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई काम न होते देख कुछ दिनों पहले हम ग्रामीणों ने सड़क अवरोध किया था और लालचंद घाट से वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी. बाद में लालचंद घाट के मालिक ने समय-समय पर पानी पटाने का आश्वासन दिया था. दो-तीन दिनों से डंपर के जरिये सड़कों पर पानी पटाया जा रहा है.

लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है. मलाकी मुर्मु का कहना है कि जब तक सड़क पर पानी का असर रहता है धूल नहीं उड़ती, लेकिन पानी के सूखते ही वापस धूल भी उड़ने लगती है. ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर जल्द पक्की सड़क नहीं बनवायी गया व पानी के संकट से निजात नहीं दिलाया गया तो बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा. इस बाबत इलाके की पंचायत सदस्य शांति सुब्बा, सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधिपति तापस सरकार से संपर्क करने की कोशिश की गयी, लेकिन दोनों से ही संपर्क नहीं हो सका.

लालचंद घाट के मालिक ने उठाया सवाल
समस्याओं के लिए ग्रामीणों द्वारा बार-बार सड़क अवरोध करने और बालू-बजरी ढोनेवाले वाहनों के आवागमन बंद करा देने पर लालचंद घाट के मालिक लालचंद उरांव ने सवाल खड़ा किया है. हालांकि समस्याओं के लिए वह ग्रामीणों के साथ खड़े दिखे. उन्होंने कहा कि सड़क बनवाने के अलावा अन्य समस्याओं की ओर ग्राम पंचायत व सिलीगुड़ी महकमा परिषद को ध्यान देना चाहिए. लेकिन अपने अधिकार के लिए सड़क बंद करना समस्या का निदान नहीं है. श्री उरांव ने कहा कि बालू-बजरी ढोनेवाले अगर वाहन बंद हो जायेंगे तो आम लोगों को कई समस्याओं से जूझना पड़ेगा. साथ ही सरकार को भी काफी नुकसान होगा. केवल लालचंद घाट से ही सरकार के खाते में मात्र एक महीने में लाखों रुपये रॉयल्टी के रूप में जमा होते हैं. श्री उरांव के सहायक बबलू चौधरी ने कहा कि कुछ दिनों से हमलोग अपने डंपर से पानी सड़क पर पटा रहे हैं. लेकिन यह स्थायी हल नहीं है. साथ ही उन्होंने प्रशासन से सड़क बनाने और सड़क दखल किये जाने की ओर ध्यान देने की गुजारिश की है.

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