इन नलकूपों पर जाने के लिए लोगों को काफी दूरी तय करनी पड़ती है. पानी की किल्लत ऐसी है कि इन नलकूपों पर पानी लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लग जाती हैं. कभी-कभी तो मारपीट जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो जाती है. बाबूबासा की रहने वाली जीना राई नामक एक महिला का कहना है कि वह यहां किराये के मकान में रहती है. मकान मालिक ने जो कुआं खुदवाया है, उसमें पानी नहीं है. करीब दो सौ मीटर दूर नलकूप से पानी लाना पड़ता है. इसी प्रकार की समस्या मीनू थापा, मित्रा भटराई, हेमराज मंडल, गंगा मंडल, अर्जुन मंडल, सपना बुराखोती आदि की भी है. इन लोगों का कहना है कि पूरे इलाके के लोग सिर्फ एक नलकूप पर निर्भर हैं.
करीब 150 से अधिक परिवार इसी नलकूप से पानी लेते हैं. ऐसा नहीं है कि नलकूपों की स्थिति बहुत अच्छी है. नलकूप में भी लगता है जलस्तर काफी नीचे चला गया है जिसकी वजह से बहुत कम मात्रा में पानी निकल रहा है. एक बाल्टी पानी निकलने में 15 मिनट से अधिक का समय लग जाता है. स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, इस इलाके के अधिकांश घरों में पानी के लिए कुएं खुदवाये गये हैं. ग्राम पंचायत द्वारा नियमित रूप से पानी की आपूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं है. इलाकाई लोगों का कहना है कि अधिकांश कुओं के जल सूख गये हैं. कुछ के जलस्तर में काफी कमी आ गई है. ग्राम पंचायत अथवा सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं की जा रही है. यही वजह है कि यहां के लोग महाराष्ट्र में लातूर जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं. यहां उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के लातूर में भयंकर सूखा पड़ा हुआ है. पानी की कमी की वजह से लोगों का जीना दूभर हो गया है.
मौसम विभाग द्वारा मिली जानकारी के अनुसार इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना है. इस बीच, मिलन मोड़ के कई लोग पानी की इस किल्लत के लिए रेत माफिया को दोषी ठहरा रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि कभी भी इस इलाके में पानी की किल्लत नहीं हुई थी. गुलमा जंगल के नजदीक लालचंद घाट पर अवैध खनन की वजह से ही अकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है. इलाकाई लोगों ने आगे कहा कि नदी से अवैध रूप से गिट्टी और बालू का खनन कर रेत माफिया के लोग तो चांदी काट रहे हैं, लेकिन इसकी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है.
