ट्राफिक जाम से निजात के लिए मास्टर प्लान जल्द

सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी शहर में ट्राफिक जाम की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर रूप लेती जा रही है. इसका सबसे बड़ा कारण शहर में गाड़ियों की बढ़ती तादाद है. परिवहन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एक साल में सिलीगुड़ी शहर में 30 हजार से ज्यादा बड़ी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन होता है. इसके अलावा दोपहिया गाड़ियां […]

सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी शहर में ट्राफिक जाम की समस्या दिन-ब-दिन गंभीर रूप लेती जा रही है. इसका सबसे बड़ा कारण शहर में गाड़ियों की बढ़ती तादाद है. परिवहन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, एक साल में सिलीगुड़ी शहर में 30 हजार से ज्यादा बड़ी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन होता है. इसके अलावा दोपहिया गाड़ियां भी हैं. कुल मिलाकर शहर में हर साल लगभग 50 हजार गाड़ियां बढ़ जाती हैं.
सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस के सूत्रों ने बताया कि अगर नयी सड़कें नहीं बनीं और गाड़ियां इसी तरह बढ़ती रहीं, तो अगले पांच-छह वर्षों में सड़क पर चलना भी मुश्किल हो जायेगा. खबर है कि इसी चिंता को ध्यान में रखते हुए सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट शहर में यातायात को लेकर एक मास्टर प्लान बनाने की तैयारी कर रहा है. सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा का कहना है कि गाड़ियों की बढ़ती संख्या के मामले में सिलीगुड़ी ने कई मेट्रो शहरों को पीछे छोड़ दिया है. हर साल 30 हजार बड़ी गाड़ियां यहां के रास्तों पर और उतर जाती हैं. लेकिन इसके मुताबिक शहरों में पर्याप्त सड़कें नहीं हैं. इसे लेकर एक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही राज्य सरकार के पास भेजा जायेगा.
पिछले कुछ वर्षों में सिलीगुड़ी शहर का तेजी से फैलाव हुआ है. शहर की आबादी और क्षेत्रफल में तेज बढ़ोतरी हुई है. शहर में अनेक इलाके बिना किसी प्लानिंग के बस गये हैं. इन सबका नतीजा यह हुआ है कि शहर की ट्राफिक व्यवस्था चौपट हो गयी है. घंटों तक जाम में लोगों को फंसे रहना पड़ता है. हिलकार्ट रोड, सेवक रोड और विधान रोड में ट्राफिक जाम की समस्या सबसे गंभीर है. इन सड़कों पर गाड़ियों का इतना बोझ है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है. हालत इतनी खराब है कि ट्राफिक पुलिस भी खुद को बेबस महसूस करती है.
पुलिस कमिश्नरेट के सूत्रों ने बताया कि सिलीगुड़ी मेट्रोपोलिटन पुलिस ने ट्राफिक समस्या को लेकर कई बार समीक्षा की. इन समीक्षा बैठकों में जो समाधान सामने आये, उनको लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार के पास भेजी गयी थी. लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ. इसके बाद अब कमिश्नरेट ने मास्टर प्लान तैयार किया है.
सूत्रों ने बताया कि समीक्षा में ट्राफिक जाम के जो मूल कारण चिन्हित किये गये हैं, उनमें रास्तों की संख्या कम होना, फुटपाथ व फुटओवर ब्रिज, फ्लाईओवर और पार्किंग का अभाव होना शामिल हैं. रिपोर्ट में यह सुझाव भी है कि विभिन्न सरकारी दफ्तरों को शहर से बाहर ले जाया जाये. इसके अलावा शहर में कम से कम चार स्थानों पर फ्लाईओवर बनाने का ट्राफिक पुलिस ने सुझाव दिया है. हाशमी चौक, सेवक मोड़, पानीटंकी मोड़, वीनस मोड़, जंक्शन और दार्जिलिंग मोड़ में फुटओवर ब्रिज बनाने की बात कही गयी है. रिपोर्ट में फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराने, तेज रफ्तार गाड़ियों के लिए लेन अलग करने और पार्किंग स्थल तैयार करने का भी सुझाव दिया गया है.

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