4जी के जमाने में खत्म हुआ दीवार लेखन

चुनाव के समय भी कोई अहमियत नहीं कारीगरों को घर चलाने में भी परेशानी सबने दूसरे पेशे की ओर किया रूख सिलीगुड़ी : की पैड से स्मार्ट फोन व 2जी से 4जी तक आने में बहुत कुछ बदल गया है. इस हाईटेक दौर में चुनाव प्रचार भी हाईटेक तरीके से हो रहा है. चुनाव प्रचार […]

चुनाव के समय भी कोई अहमियत नहीं

कारीगरों को घर चलाने में भी परेशानी
सबने दूसरे पेशे की ओर किया रूख
सिलीगुड़ी : की पैड से स्मार्ट फोन व 2जी से 4जी तक आने में बहुत कुछ बदल गया है. इस हाईटेक दौर में चुनाव प्रचार भी हाईटेक तरीके से हो रहा है. चुनाव प्रचार की परंपरा बदलने से सबसे अधिक नुकसान दीवाल लेखन वाले कारीगरों को हुआ है. ऐसे कारीगर अब उपार्जन की दूसरी राह पर चल पड़े हैं.
पहले चुनाव में बैनर, पोस्टर व लिफलेट सहित दीवार लेखन का काम सबसे ज्यादा होता था. गैर सरकारी मकान, इमारत कार्यालय की चहारदीवारी पर उम्मीदवारों व पार्टी के समर्थन में चुनाव प्रचार लिखा जाता था. अब तो कंपनी व उत्पादों के प्रचार में भी दीवार लेखन प्रक्रिया ना के बराबर करायी जाती है. एक तरह से कहें तो इस हाईटेक दौर में दीवार लेखन का काम ना के बराबर रह गया है. दीवार लेखन का स्थान इंटरनेट व सोशल मीडिया ने ले लिया है.
4जी के इस दौर में करीब-करीब हर व्यक्ति के पास स्मार्टफोन है और इंटरनेट भी. दीवार लेखन व्यवसाय से जुड़े शांति नगर निवासी बबलू साहा ने बताया कि उसने अपने पिता से यह कला सीखी थी. अब इस कला से उपार्जन कर अपना व परिवार का पेट पालना दूभर हो गया है. उसने बताया कि वर्ष 1987 से वह दीवार लेखन का काम पेशे के तौर पर कर रहा है. पहले उत्पादों, निजी कार्यालय, शिक्षण व कला संस्थानों के प्रचार-प्रसार के लिए भी दीवार लेखन कराया जाता था.
चुनाव के दौरान शहर के सभी दीवारों पर राजनैतिक दलों के उम्मीदवारों का प्रचार होता था. लेकिन अब चुनाव में भी दीवार लेखन का काम बस नाम भर के लिए है. पहले के मुकाबले दैनिक मजदूरी तो बढ़ी है ,लेकिन काम काफी घट गया है. इस पेशे से अपना और परिवार का पेट पालना मुश्किल है. बल्कि इस पेशे से जुड़े काफी कारीगर दूसरा पेशा अपना रहे हैं या फिर दूसरे राज्य में मजदूरी कर रहे हैं. इस पेशे से जुड़े अभिजीत दास, प्रमोद सरकार व अन्य का भी यही कहना है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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