दार्जिलंग : गोजमुमो (विमल गुट) के नेताओं द्वारा केंद्रीय आदिवासी मंत्री जुएल ओराम से मिलने और उन्हें ज्ञापन सौंपने से पहाड़ पर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. तरह-तरह की अटकलों का दौर भी शुरू हो गया है. मंगलवार को गोजमुमो के वर्तमान अध्यक्ष तथा जीटीए चेयरमैन विनय तमांग ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने केंद्रीय मंत्री को ज्ञापन सौंपे जाने को अवसरवादी और स्वार्थलिप्सा की राजनीति बताया है.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को ही कर्नल रमेश आले तथा कई अन्य विमल गुरुंग समर्थक नेताओं ने नयी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री एसएस अहलुवालिया के साथ केंद्रीय जनजाति मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात की. इनलोगों ने पहाड़ पर 11 गोरखा जातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग की. इस खबर के दार्जिलिंग पहुंचते ही विनय तमांग गुट में खलबली मच गयी.
विनय तमांग का कहना है कि जिन नेताओं को जनता ने खारिज कर दिया है, वे अपना अस्तित्व बचाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं. इन नेताओं ने पहाड़ पर 105 दिनों तक बंद बुलाकर यहां के लोगों को काफी तकलीफ दी. अब पहाड़ पर स्थिति सामान्य है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इससे पहले ही जुएल ओराम को एक पत्र देकर 11 गोरखा जातियों को जनजाति का दर्जा देने की मांग कर चुकी हैं.
विनय ने कहा कि पड़ोसी राज्य सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के साथ भी पश्चिम बंगाल सरकार के बेहतर संबंध चल रहे हैं. विमल गुट के नेता इस संबंध को एक बार फिर से बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इसे वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से जोड़ दिया. श्री तमांग ने कहा है कि पहाड़ पर पूरी तरह से शांति बनी हुई है. लोकसभा चुनाव से पहले कुछ लोग यहां राजनीति करने में लगे हुए हैं. ऐसे नेता पहाड़ के लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं.
