उत्तरकन्या में एक और बैठक विफल : फिर तय नहीं हो पायी चाय श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी

सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों की काफी पुरानी मांग न्यूनतम मजदूरी का मसला हल होने का नाम ही नहीं ले रहा है. न्यूनतम मजदूरी के बदले मिलने वाली तारीख पर तारीख के क्रम में सोमवार को भी एक नयी तारीख मिल गयी. लेकिन इस बार चाय बागान श्रमिक संगठन ज्वाइंट फोरम इस […]

सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल के चाय बागान श्रमिकों की काफी पुरानी मांग न्यूनतम मजदूरी का मसला हल होने का नाम ही नहीं ले रहा है. न्यूनतम मजदूरी के बदले मिलने वाली तारीख पर तारीख के क्रम में सोमवार को भी एक नयी तारीख मिल गयी. लेकिन इस बार चाय बागान श्रमिक संगठन ज्वाइंट फोरम इस नयी तारीख को मानने से इनकार कर दिया है.
बीच में ही बैठक छोड़ कर चले जाने का आरोप राज्य के श्रम आयुक्त पर लगाकर ज्वाइंट फोरम ने मिनी सचिवालय उत्तरकन्या में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया . इसके साथ ही मंगलवार से तराई-डुआर्स के सभी चाय बागानों में अगले तीन दिनों तक बंद भी बुलाया है. जबकि मंगलवार से अगले तीन दिनों तक पहाड़ के चाय बागानों से उत्पादन को निकालने पर रोक लगाकर राज्य सरकार के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया है.
चाय बागान श्रमिकों के हित में राज्य सरकार के खिलाफ लड़ाई में शामिल ज्वाइंट फोरम की मांगो को उचित बताकर सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर सह माकपा विधायक अशोक भट्टाचार्य भी उत्तरकन्या पहुंचकर धरना प्रदर्शन में शामिल हुए.
क्या कहना है श्रम आयुक्त का
राज्य के श्रम आयुक्त जावेद अख्तर ने बताया कि श्रमिक संगठनों ने फूड बास्केट को लेकर कुछ ऐसे सवाल खड़ा किया जिससे मसला फिर वहीं पहुंच गया जहां था. उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में रोटी और कपड़ा के लिए 158 रूपया तय किया था. जबकि बढ़ती मंहगाई के मद्देनजर फूड बास्केट को बढ़ाकर 172 रूपया तय किया गया.
इसके साथ अन्य लाभ जैसे घर, चिकित्सा, शिक्षा आदि पर विचार होना था. लेकिन श्रमिक पक्ष ने फूड बास्केट के 172 रूपये पर सवालिया निशान लगा दिया है. श्रमिक संगठन की ओर से कुछ नये आंकड़े पेश किया गया है जिसकी जांच करने में कुछ समय लगेगा. श्री अख्तर ने आगे कहा कि यदि फूड बास्केट को लेकर फिर से चर्चा शुरू करने का मतलब है कि न्यूनतम मजदूरी के मसले को फिर से शुरू करना. फिर इसमें और वक्त लगेगा.
बदलते बाजार दर के अनुसार फूड बास्केट निर्धारित करने में काफी समय लगेगा. जबकि राज्य सरकार न्यूनतम मजदूरी को जल्द से जल्द लागू करने को तत्पर है. ज्वाइंट फोरम द्वारा फूड बास्केट पर उठाये गये सवालों को लेकर अगले 20 अगस्त को कोलकाता में न्यूनतम मजदूरी कमिटी की बैठक में चर्चा का प्रस्ताव दिया गया है.
बार-बार बैठक, नतीजा नदारद
उल्लेखनीय है कि उत्तर बंगाल के चाय श्रमिक न्यूनतम मजदूरी की मांग को लेकर पिछले काफी लंबे अरसे से आंदोलन करते आ रहा है. न्यूनतम मजदूरी को लेकर अब तक कई बैठक हो चुकी है लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ. न्यूनतम मजदूरी के बदले राज्य सरकार ने चाय श्रमिकों को अंतरिम दिया है. बीते 30 जुलाई को उत्तरकन्या में त्रिपक्षीय बैठक के जरिए न्यूनतम मजदूरी पर निर्णय लेने का आश्वासन सरकार ने दिया था.
लेकिन बाद में यह बैठक 6 अगस्त तक टाला गया. इधर ज्वाइंट फोरम ने भी 30 अगस्त की बैठक में निर्णय के अनुसार अपनी रणनीति तय कर ली थी. ज्वाइंट फोरम ने बीते 23 से 25 जुलाई तक उत्तर बंगाल के चाय बागानों मे इंडस्ट्रियल स्ट्राइक बुलायी थी. लेकिन राज्य सरकार के आवेदन पर स्ट्राइक को 30 जुलाई और फिर 6 अगस्त तक स्थगित रखा.
लेकिन सोमवार को न्यूनतम मजदूरी को लेकर हुयी बैठक में भी निर्णय न लिये जाने से ज्वाइंट फोरम का गुस्सा भड़क उठा. इसके बाद ज्वाइंट फोरम के नेता उत्तरकन्या में ही धरने पर बैठ गये. म‍ंगलवार से तीन दिवसीय चाय उद्योग बंद की घोषणा कर दी.
नहीं आये श्रम मंत्री
निर्धारित तिथि के अनुसार सोमवार को उत्तरकन्या के सभागार में त्रिपक्षीय बैठक आयोजित हुयी. इस बैठक में राज्य के श्रम मंत्री के उपस्थित होने की बात थी लेकिन किसी आवश्यक कार्य की वजह से वह बैठक में शामिल नहीं हो पाये. आज की बैठक में राज्य से श्रम आयुक्त जावेद अख्तर, श्रम मंत्रालय के सचिव, बागान मालिक पक्ष व श्रमिक संगठन के सदस्य उपस्थित थे.
ज्वाइंट फोरम का आरोप है कि श्रम आयुक्त जावेद अख्तर बीच में ही बैठक समाप्त कर चले गये. जबकि ज्वाइंट फोरम लगातार बैठक जारी रखने की मांग कर रहे थे.
ज्वाइंट फोरम का प्रस्ताव मानने से इंकार
जबकि ज्वाइंट फोरम फिर से बैठक की बात को मानने से इनकार कर उत्तरकन्या में धरना शुरू कर दिया है. ज्वाइंट फोरम के संयोजक जियाउल आलम ने बताया कि राज्य श्रम आयुक्त रोटी और कपड़ा के लिए निर्धारित 172 रूपए की व्याख्या तक नहीं कर पा रहे हैं. नियमानुसार 172 रूपए में एक श्रमिक परिवार के तीन लोगों का रोटी और कपड़ा कैसे संभव होगा. साथ ही न्यूनतम मजदूरी मे निहित घर, चिकित्सा, शिक्षा, आमोद-प्रमोद आदि की भी व्याख्या नहीं की और बीच में ही बैठक समाप्त कर चले गये.
जबकि हम चाहते हैं कि न्यूनतम मजदूरी के लिए सरकार की ओर से प्रस्तावित 172 रूपए पर लगातार चर्चा होनी चाहिए. इंडस्ट्री में हर मसले का समाधान विचार-विमर्श से ही होता है. चर्चा वापस शुरू करने की मांग को लेकर ही हम धरने पर बैठे हैं. ज्वाइंट फोरम के सदस्य मंगलवार तक उत्तरकन्या में धरने पर रहेगें. इसके अतिरिक्त मंगलवार से तराई व डुआर्स के चाय बागानों में तीन दिवसीय बंद का आह्वान कर दिया है. बल्कि पहाड़ के बागानों से उत्पादित चाय के निर्यात पर तीन दिन के लिए रोक लगा दी गयी है.
इसके साथ ही न्यूनतम मजदूरी को लेकर ज्वाइंट फोरम की राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन की हुंकार भर दी गयी. खबर लिखे जाने तक ज्वाइंट फोरम के जिया उल आलम, आलोक चक्रवर्ती, समन पाठक, गौतम घोष, मणि कुमार दर्नाल, अमर लामा सहित अन्य लोग घरने पर बैठे हुए थे. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए न्यू जलपाईगुड़ी थाने की पुलिस भी भारी संख्या में उत्तरकन्या परिसर में पहुंची है.

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