बंगाल के 135 ऐतिहासिक स्मारकों की बदलेगी सूरत, एएसआइ और पर्यटन विभाग के बीच हुआ समझौता

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ हाथ मिलाया है. इस समझौते के तहत 135 स्मारकों का सौंदर्यीकरण और पर्यटक सुविधाओं का विकास किया जाएगा.

कोलकाता से अमर शक्ति प्रसाद की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में पर्यटन को बढ़ावा देने और राज्य की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. पर्यटन विभाग ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के साथ एक समझौता किया है. इसके तहत राज्य के 135 ऐतिहासिक स्मारकों और भवनों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की योजना है. सरकार का उद्देश्य इन धरोहर स्थलों को संरक्षित रखने के साथ-साथ उन्हें पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक और सुविधाजनक बनाना है.

ऐतिहासिक स्थलों पर बढ़ेंगी पर्यटक सुविधाएं

परियोजना के तहत चिन्हित स्मारकों और ऐतिहासिक भवनों का सौंदर्यकरण किया जायेगा. पर्यटकों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने के साथ इन स्थलों के इतिहास, वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व को भी लोगों तक पहुंचाने की योजना है. इसके लिए कई स्थानों पर लाइट एंड साउंड शो आयोजित किये जा सकते हैं. साथ ही स्थानीय संस्कृति और परंपरा से पर्यटकों को जोड़ने के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित करने की तैयारी है. पर्यटन विभाग का मानना है कि ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने से राज्य में आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.

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संयुक्त टीम करेगी विकास और संरक्षण का काम

योजना को जमीन पर उतारने के लिए पर्यटन विभाग और एएसआइ के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की जायेगी. यह टीम चिन्हित 135 स्मारकों के संरक्षण, विकास और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों के लिए आपसी समन्वय के साथ काम करेगी. स्मारकों की ऐतिहासिक संरचना और पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य किये जाने पर जोर रहेगा. समझौते के तहत इन स्थलों पर पर्यटन गतिविधियों से होने वाली आय या मुनाफे को राज्य के पर्यटन विभाग और एएसआइ के बीच साझा करने की व्यवस्था का भी प्रस्ताव है. इससे एक ओर ऐतिहासिक धरोहरों के रखरखाव और संरक्षण के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे, वहीं दूसरी ओर इन स्थलों को पर्यटन के नये केंद्र के रूप में विकसित करने का रास्ता खुलेगा.

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By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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