पश्चिम बंगाल में चीनी 70 रुपए किलो, वजह एथेनॉल या जमाखोरी!

Bengal Sugar Price Hike: पश्चिम बंगाल में त्योहारी सीजन से पहले चीनी के दाम 70 रुपए प्रति किलो पहुंचे. CWBTA ने पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण को जिम्मेदार ठहराया, तो मंत्री दिलीप घोष ने जमाखोरी को प्रमुख वजह बताया.

Bengal Sugar Price Hike: पश्चिम बंगाल में त्योहारों से पहले खुदरा बाजार में चीनी के दाम बढ़कर 70 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गये हैं. इसके असर से गुड़, बताशा और नकुलदाना भी महंगे हो गये हैं. कारोबारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

एक महीने में 20 रुपए बढ़ गये चीनी के दाम

कारोबारियों ने बताया कि पिछले एक महीने में चीनी के दाम में 20 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है. पिछले 4-5 दिन में ही चीनी की कीमतों में अचानक 10 प्रतिशत का उछाल आया है. चीनी से बने उत्पादों जैसे गुड़, बताशा और नकुलदाना के दाम में भी इसी तरह की बढ़ोतरी हुई है.

एक दशक बाद केंद्र ने दी 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति

बंगाल के व्यापारियों ने बताया है कि केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार शाम चीनी मिलों को 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति दी है. करीब एक दशक बाद इस तरह का कदम उठाया गया है, लेकिन इसका असर अभी खुदरा बाजारों तक नहीं पहुंचा है.

चीनी मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है. थोक कीमतें पहले ही बढ़कर 65 रुपए किलोग्राम हो गयीं हैं और खुदरा कीमतें करीब 70 रुपए किलोग्राम तक पहुंच जायेंगी. एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ना इसकी प्रमुख वजहों में से एक है. इसके अलावा, एथनॉल का अधिक मात्रा में मिश्रण से अब वाहनों को भी नुकसान पहुंचा रहा है. -सुशील पोद्दार, अध्यक्ष, कन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशन

15 दिन से अधिक चीनी का भंडार नहीं रख पायेंगे व्यापारी

सरकार ने उन थोक खरीदारों पर भी भंडार सीमा लगा दी है, जो महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करते हैं. उनके पास 15 दिन की खपत के बराबर ही चीनी का भंडार रखने की सीमा तय की गयी है.

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65 रुपए हो चुकीं हैं थोक कीमत : सुशील पोद्दार

कन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशन (सीडब्ल्यूबीटीए) के अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने कहा कि चीनी मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है. थोक कीमतें पहले ही 65 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गयीं हैं.

70 रुपए से कम में नहीं बेच सकता चीनी : व्यापारी

एक स्थानीय किराना दुकान के मालिक ने कहा- मैंने सिर्फ 3 दिन पहले खुली चीनी 65 रुपए किलोग्राम बेची पर थी. आज मैं इसे 70 रुपए किलोग्राम से कम में नहीं बेच सकता. उधर, सीडब्ल्यूबीटीए (CWBTA) के अध्यक्ष पोद्दार ने कहा कि सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी चिंता का विषय है. सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देना कीमतों में वृद्धि रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होगा और अधिक हस्तक्षेप की जरूरत है. उन्होंने कहा कि 10 लाख टन चीनी देश की करीब 2 सप्ताह की मांग के बराबर ही है.

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जमाखोरी की वजह से बढ़ी कीमतें : दिलीप घोष

पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल मिश्रण को नहीं, बल्कि जमाखोरी को जिम्मेदार ठहराया. हालांकि, एक प्रमुख चीनी मिल कंपनी के अधिकारी ने कहा कि चीनी की पेराई अप्रैल में खत्म हो गयी थी और मिलें अब केवल अपने भंडार से चीनी जारी कर रही हैं. उन्होंने कहा कि इस समय चीनी मिलें इससे अधिक कुछ नहीं कर सकतीं.


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By मिथिलेश झा

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